Baglamukhi Jayanti 2021: बगलामुखी जयंती आज, पढ़ें शत्रुओं का नाश करने वाली राजसत्ता की देवी ‘बगलामुखी’ की कथा

आज बगलामुखी जयंती है. मां बगलामुखी राजसत्ता की देवी मानी जाती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बगलामुखी देवी की पूजा-अर्चना करने वाले जातकों के शत्रुओं का नाश होता है. सभी बाधाएं और संकट भी मिट जाते हैं. मां का एक अन्य नाम देवी पीताम्बरा भी है. आज भक्तों ने सुबह घर पर ही मां बगलामुखी की पूजा अर्चना की और उन्हें पीली वस्तुओं का भोग लगाया और आरती व चालीसा का पाठ किया. कुछ भक्तों ने आज मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी रखा है. शाम की पूजा के बाद भक्त घर पर ही मां बगलामुखी की कथा सुनेंगे. आइए पढ़ें बगलामुखी मां की पावन कथा…

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बगलामुखी देवी की पौराणिक कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा. इससे चारों ओर हाहाकार मच जाता है और अनेक लोग संकट में पड़ जाते हैं और संसार की रक्षा करना असंभव हो जाता है. यह तूफान सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था जिसे देखकर भगवान विष्णुजी चिंतित हो गए.

इस समस्या का कोई हल न पाकर वे भगवान शिव का स्मरण करने लगे. तब भगवान शिव उनसे कहते हैं कि शक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अत: आप उनकी शरण में ही जाएं. तब भगवान विष्णु हरिद्रा सरोवर के निकट पहुंचकर कठोर तप करते हैं. भगवान विष्णु ने तप करके महात्रिपुरसुन्दरी को प्रसन्न किया तथा देवी शक्ति उनकी साधना से प्रसन्न हुईं और सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीड़ा करतीं महापीत देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ.

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उस समय चतुर्दशी की रात्रि को देवी बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं. त्र्यैलोक्य स्तम्भिनी महाविद्या भगवती बगलामुखी ने प्रसन्न होकर विष्णुजी को इच्छित वर दिया और तब सृष्टि का विनाश रुक सका. देवी बगलामुखी को बीर रति भी कहा जाता है, क्योंकि देवी स्वयं ब्रह्मास्त्ररूपिणी हैं. इनके शिव को एकवक्त्र महारुद्र कहा जाता है इसीलिए देवी सिद्ध विद्या हैं. तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं. गृहस्थों के लिए देवी समस्त प्रकार के संशयों का शमन करने वाली हैं. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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