पूरी दुनिया खत्म होने को लेकर कैसी-कैसी मान्यताएं बताई जा रही हैं, क्या सच में दुनिया तबाह हो जाएगी…?

तबाही के दावे : कुछ निराधार कुछ प्रमाण

यूं तो धर्म ग्रंथों में दुनिया के खत्‍म होने का चक्र न‍िर्धारित क‍िया गया है। लेकिन फिर भी समय-समय पर कुछ घटनाओं को लेकर भी ऐसी भव‍िष्‍यवाणी की जाती है कि यह घटना दुनिया को खत्‍म कर देगी। हालांकि अब तक की गई ये भव‍िष्‍यवाणी तो कोरी साबित हुई हैं। लेकिन हिंदू धर्म शास्‍त्रों में ऐसी बातों का जिक्र मिलता है जो साक्षात् प्रमाण हैं। ये स्थितियां हैरान भी करती हैं। तो आइए जानते हैं क‍ि कब-कब दुनियां खत्‍म होने की भव‍िष्‍यवाणी हुई और धर्म शास्‍त्रों में किए गए उल्‍लेख का किन-किन स्‍थानों से संबंध है? 

25 फरवरी 1524 की भव‍िष्‍यवाणी

जर्मनी के सम्‍मान‍ित गण‍तिज्ञ और ज्‍योतिषी johannes stoffler ने भव‍िष्‍यवाणी की थी कि 25 फरवरी 1524 को दुनिया तबाह हो जाएगी। उन्‍होंने कहा था क‍ि इस द‍िन पूरी पृथ्‍वी पानी में डूब जाएगी। इस भव‍िष्‍यवाणी के बाद हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल बना। इस दिन बाढ़ भी आई लेकिन दुनिया तबाह होने की भव‍िष्‍यवाणी भी कोरी साब‍ित हुई।

25 मार्च 1988 की भव‍िष्‍यवाणी

कहा जाता है कि दुनिया खत्‍म होने की भव‍िष्‍यवाणी ताइवान के धार्मिक गुरु मिंग चेन ने ईसाई और बौद्ध धर्म को आधार मानते हुए 25 मार्च 1988 को तबाही होने की घोषणा की थी। उन्‍होंने बताया था कि इस दिन गॉड धरती पर आएंगे और पूरी दुनिया खत्‍म कर देंगे। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ।

साल 1997 में दुन‍िया खत्‍म होने का दावा

साल 1997 को लेकर भी दुनिया खत्‍म होने का दावा किया गया था। अमेर‍िकन रिलिजियस लीडर मार्शल एप्‍पलवाइट ने कहा था क‍ि एक स्‍पेसक्राफ्ट धरती से टकराएगा, जिसे नासा नहीं देख सकेगा। लेकिन बता दें क‍ि यह भव‍िष्‍यवाणी भी गलत साबित हुई। वहीं बाद में उन्‍होंने खुदकुशी कर ली।

यह भी पढ़े: दुनिया की पहली सर्जरी ऐसे हुई थी, गजब है कहानी

इन वर्षों में भी किया गया दावा

दुनिया खत्‍म होने को लेकर साल 2011, 2012 और 2016 में भी भव‍िष्‍यवाणी की गई थी। 2011 में अमेरिका के ज्‍योतिषी हेरॉल्‍ड कैंप‍िन ने बाइबिल के कुछ सूत्रों को आधार बनाकर दुनिया खत्‍म होने का दावा किया था। वहीं 2012 में माया सभ्‍यता के आधार पर कहा गया कि कैलेंडर में 21 द‍िसंबर 2012 के बाद की तिथि नहीं है। यान‍ि कि यही पृथ्‍वी पर प्रलय का द‍िन था। इसके अलावा साल 2016 में 29 जुलाई 2016 को भी दुन‍िया के अंत की भव‍िष्‍यवाणी हुई। कहा गया हे कि उल्‍का प‍िंड धरती से टकराएगा और पृथ्‍वी खत्‍म हो जाएगी। यह दावा भी कोरा साबित हुआ।

2018 में भी हुई थी भव‍िष्‍यवाणी

दुनिया खत्म होने को लेकर साल 2018 में भी भव‍िष्‍यवाणी हुई। कहा गया कि 23 सितंबर को निबेरू नाम का एक ग्रह धरती से टकराएगा और दुनिया खत्‍म हो जाएगी। इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार तो नहीं है लेकिन तब प्लेनेट एक्स द-2017 अराइवल के लेखक डेविड मीडे ने कहा था कि पवित्र ग्रंथ बाइबल में इस ग्रह का उल्लेख मिलता है और वह इसे मानते भी थे। बहरहाल यह दावा भी कोरा साबित हुआ।

यह भी पढ़े: मासिक राशिफल मई 2020: जानिये कैसा गुजरेगा मई का महीना आपके लिए

29 अप्रैल 2020 को दुनिया खत्‍म का दावा

दुन‍िया खत्‍म होने का दावा 2020 के लिए भी किया गया था। कहा जा रहा था कि 29 अप्रैल को एक एस्‍टेरॉयड धरती से टकराएगा और यह पूरी दुनिया को तबाह कर देगा। हालांकि नासा के सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्‍जेक्‍ट स्‍टडीज के मुताबिक इस एस्‍टेरॉयड के पृथ्‍वी से टकराने की कोई संभावना नहीं थी। बहरहाल दुनिया खत्‍म होने की यह घटना भी कोरी साबित हुई।

हिंदू धर्म में दुनिया खत्‍म होने की मान्‍यताएं

दुन‍िया खत्‍म होने को लेकर की गई अब तक की भव‍िष्‍यवाणी भले ही कोरी साबित हुई हैं। लेकिन हिंदू धर्म शास्‍त्रों में जिन बातों का उल्‍लेख मिलता है वह काफी हद तक प्रमाण रूप में सामने आती द‍िखाई दे रही हैं। इन्‍हीं प्रमाणों में से एक है गुजरात के गोधरा में स्थित मृदमहेश्वर महादेव मंदिर। दरअसल इस मंदिर का श‍िवलिंग लगातार बढ़ रहा है। इसे लेकर मान्‍यता है कि जिस दिन यह शिवलिंग मंदिर की छत को छू लेगा, उस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी। बता दें कि मंद‍िर का श‍िवलिंग 1 चावल के दानें के बराबर बढ़ता है। जबकि मंदिर की छत से टकराने के लिए इसकी लंबाई साढ़े 8 फीट होने की जरूरत है। ऐसे में इसे इतना बड़ा होने में लाखों वर्ष लग जाएंगे।

महाकाल की इस गुफा में भी है प्रमाण

उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं मंडल में गंगोली हाट कस्बा है। इस कस्बे में स्थित है पाताल भुवनेश्वर गुफा। धार्मिक मान्यता है कि इस गुफा में भगवान शिव का वास है और यहां शिव पूजन के लिए सभी देवी-देवता भी आते हैं। गुफा में लगे खंभे और पिंड का रहस्यइस गुफा में चार खंभे हैं। इन खंभों को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग का प्रतीक माना जाता है। जो खंभा कलयुग का प्रतीक माना जाता है, उस पर छत से जुड़ा एक पिंड नीचे की तरफ लटक रहा है। यह पिंड 7 करोड़ साल में 1 इंच बढ़ता है। मान्यता है कि जिस दिन यह पिंड बढ़कर कलयुग वाले खंभे से टकरा जाएगा उस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी। स्कंद पुराण में भी इसका उल्‍लेख मिलता है।

इस खंड‍ित श‍िवलिंग में भी छिपा है राज

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित वनेश्वर महादेव के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर का शिवलिंग अपने स्थान से खिसकता रहता है। इस गांव के निवासी इस बात का दावा करते हैं। कहते हैं कि जिस दिन यह शिवलिंग मंदिर से बाहर आ गया, उस दिन दुनिया का विनाश हो जाएगा। इस मंदिर की एक और विशेषता है कि यहां यहां खंडित शिवलिंग की पूजा होती है।