Bhai Dooj 2020: 16 नवंबर को भाईयों की कुशलता का पर्व यम द्वितीया-भाईदूज, जानिए महत्व

भाईदूज पर भाई के माथे पर तिलक करने का अति शुभ मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 43 मिनट बजे से शायं 04 बजकर 28 मिनट तक।

भाई-बहन का आपसी प्रेमपर्व भैयादूज कार्तिक शुक्लपक्ष द्वितीया 16 नवंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं। बहनें अपने भाईयों के माथे पर चंदन, अक्षत अथवा रोली का तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं फिर दाहिने हाथ में कलावा बांधकर गंध, अक्षत और पुष्प से आशीर्वाद देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं कार्य-व्यापार में कामयाबी की कामना करती हैं।

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भाई को मिष्ठान्न आदि खिलाती हैं। उपहार स्वरूप भाई भी बहनों को वस्त्राभूषण देकर उन पर स्नेहवर्षा करते हैं। तिलक करने का अति शुभ मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 43 मिनट बजे से शायं 04 बजकर 28 मिनट तक।
संध्या के समय बहनें भाइयों की लम्बी उम्र की कामना के लिए यमदेव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से अपने दरवाजे पर चार मुखवाला दीप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाती हैं। भाई-बहन के इस पवित्र पर्व के कारक सूर्यदेव की पुत्री यमुना और पुत्र यमराज हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना अपने भाई ‘यम’ से बड़ा स्नेह करती थीं वे भाई यम से बार-बार निवेदन करती कि वह उसके घर आयें और भोजन करें। यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल जाते। बहुत समय व्यतीत हो जाने पर एक दिन’यम’ को बहन यमुना की बहुत याद आई। उन्होंने दूतों से यमुना को ढूढ़ने के लिए कहा, लेकिन उन्हें तलाशने में दूत विफल रहे तब यमराज स्वयं ही गोलोक गए जहां विश्राम घाट पर यमुना जी से भेंट हुई, भाई को देखते ही यमी ने भावविभोर हो उनका स्वागत सत्कार किया तथा उन्हें परम स्वादिष्ट भोजन करवाया।

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इससे प्रसन्न हो यमदेव ने कहा बहन ! वरदान में जो चाहे मांग लो, बहन यमी के मन में जन कल्याण की चिंता हुई और उन्होंने कहा, भैया मुझे वरदान दो कि जो प्राणी मेरे जल में स्नान करें उन्हें यमपुरी की कठोर यातनायें न सहनी पड़े। जनकल्याण के प्रति बहन की व्याकुलता देख यमदेव ने कहा, ‘एवमस्तु’ ! अर्थात ऐसा ही हो ! किंतु जो प्राणी अपनी बहन का तिरस्कार करेंगें उन्हें बार-बार अपमानित करेंगे उन्हें मैं यमपाश में बांधकर यमपुरी ले जाऊँगा फिर भी यदि वह तुम्हारे जल में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देगा तो उसे स्वर्गलोक में स्थान मिलेगा। तभी से यह त्योहार मनाया जाता है। जिनकी बहनें दूर रहती हैं, वे भाई अपनी बहनों से मिलने भाईदूज पर अवश्य जाते हैं और उनसे टीका कराकर उपहार आदि देते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार ‘भाईदूज’ को मृत्यु के देवता ‘यम’ को प्रसन्न करने के लिये उनका षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है। ब्रजमंडल में इस दिन बहनें अपने भाईयों के साथ यमुना में स्नान करती हैं, यमुना तट पर भाई-बहन का साथ-साथ स्नान एवं भोजन करना कल्याणकारी माना जाता है। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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