बुद्ध जयंती वाले दिन सफलता पानी है तो उनकी परेशानियों का हल खोजने से पहले उसकी वजह भी जान लें तभी सफलता मिल सकती हैं

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  • बुद्ध ने एक रस्सी में तीन गांठ बांधकर पूछा कि क्या ये वही रस्सी है जो गांठ बांधने से पहले थी?

गुरुवार, 7 मई को भगवान बुद्ध की जंयती है। वैशाख मास की पूर्णिमा पर बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है। गौतम बुद्ध ने अपने प्रवचनों में जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के सूत्र बताए हैं। इन सूत्रों को अपनाने से हमारी की बाधाएं खत्म हो सकती हैं। यहां जानिए बुद्ध से जुड़ा एक ऐसा प्रसंग जिसमें उन्होंने समस्याओं को हल करने का तरीका बताया है।
प्रचलित कथा के अनुसार एक दिन सुबह-सुबह सभी शिष्य बुद्ध के प्रवचन सुनने के लिए एक साथ बैठे हुए थे। कुछ देर बाद बुद्ध अपने साथ एक रस्सी लेकर आए। तथागत के हाथ में रस्सी देखकर सभी शिष्यों को हैरानी हुई। बुद्ध अपने आसन पर बैठे और उन्होंने रस्सी में एक के बाद एक तीन गांठ बांध दी। इसके बाद उन्होंने शिष्यों से पूछा कि क्या ये वही रस्सी है जो गांठ बांधने से पहले थी?

इस प्रश्न के जवाब में एक शिष्य ने कहा कि तथागत इसका उत्तर थोड़ा मुश्किल है। ये हमारे देखने के तरीके पर निर्भर करता है। एक तरह से तो रस्सी वही है, इसमें कोई बदलाव नहीं है। एक अन्य शिष्य ने कहा कि अब इसमें तीन गांठें लगी हुई हैं, जो कि पहले रस्सी में नहीं थीं। इसे बदला हुआ भी कह सकते हैं। 
कुछ शिष्यों ने कहा कि वास्तव में मूलरूप से रस्सी वही है, लेकिन बदली हुई दिख है, लेकिन इसका मूल स्वरूप बदला नहीं है।

शिष्यों की बात सुनकर बुद्ध ने कहा कि आप सभी सही बोल रहे हैं। अब मैं इन गांठों को खोल देता हूं। ये बोलकर बुद्ध रस्सी के दोनों सिरों को खिंचने लगे। बुद्ध ने पूछा कि क्या इस प्रकार रस्सी की गांठें खुल जाएंगी? सभी शिष्यों ने कहा कि नहीं, ऐसा करने से तो गांठें और ज्यादा कस जाएंगी। इन्हें खोलना और मुश्किल हो जाएगा। बुद्ध ने कहा कि ठीक है, अब एक अंतिम प्रश्न, इन गांठों को खोलने के लिए हमें क्या करना होगा।

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शिष्यों ने कहा कि हमें इन गांठों को ध्यान से देखना होगा, जिससे हम जान सकें कि इन्हें कैसे लगाया गया है। इसके बाद हम गांठें आसानी से खोल सकते हैं। बुद्ध इस जवाब से संतुष्ट हो गए और उन्होंने कहा कि ये सही बात है। हम परेशानियों में फंसे रहते हैं और बिना कारण जाने ही उनका हल खोजने लगते हैं। जबकि हमें पहले समस्याओं के मूल को समझना चाहिए। जब समस्याओं की वजह समझ आ जाएगी तो उन्हें सुलझाना बहुत ही आसान हो सकता है।

आपके ऊपर मुसीबतों के बादल घराने लगेंगे। आपके बड़े बच्चे की तरक्की में बाधा होगी। उसे दुर्घटनाओं का सामना भी करना पड़ सकता है और आपके पैरों में भी गड़बड़ हो सकती है। उन्नति का मार्ग अवरूद्ध हो सकता है। जीवन में एक ठहराव की स्थिति हो सकती है और जैसे रूका हुआ पानी सड़ जाता है, वैसे ही जीवन में ऊब महसूस होने लगती है। हमारे पैरों पर इस दिशा के शौचालय का बुरा असर पड़ सकता है और हर दिन सुबह 5 से 7 बजे के बीच हमें आवांछित स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। अगर किसी वजह से आपके घर की पूर्व दिशा में शौचालय है तो शौचालय की छत में बांस का प्रयोग करके दुष्टप्रभावों को कम करने की कोशिश की जा सकती है ।