8 अप्रैल तक होगा चैत्र का महीना, शास्त्रों में अनुसार आपको फिट रहने के लिए इस महीने में क्या खाना है क्या नहीं…

होलिका दहन यानी फाल्गुन माह की पूार्णिमा के अगले ही दिन से हिंदू कैलेंडर का प्रथम माह चैत्र शुरू हो जाता है। यह वसंत ऋतु में आता है और इनको ऋतुओं का राजा माना गया है। इस दिन से शीत ऋतु समाप्त हो जाती है और वसंत ऋतु का आरंभ हो जाता है। शास्त्रों में इस ऋतु के आरंभ होने पर भोजन के बारे में बताया गया है। आयुर्वेद में बताया है कि दोनों ऋतुओं के संक्रमण काल के दौरान बैक्टीरिया और वायरस समेत कई तरह के रोग होने का खतरा बना रहता है। इसलिए शास्त्रों में बताया गया है कि चैत्र का महीना जैसे संवत् के आरंभ का महीना होता है उसी तरह यह सेहत निर्माण का भी महीना होता है। इस महीने में कुछ नियमों का पालन करके आप काफी हद तक अपनी सेहत को संतुलित रख सकते हैं।

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पेट संबंधी परेशानी होती है कम चैत्र के महीने में नीम का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसलिए इन दिनों में शीतला माता की पूजा की जाती है और नीम को प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। दरअसल नीम आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करता और कई रोगों से और संक्रमण से बचाता है। इन दिनों अगर नियमित खाली पेट में नीम के कोपलों को खाएं तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। यही वजह है कि शास्त्रों में चैत्र मास में नीम सेवन को अमृत समान कहा गया है। गुडी परवा में भी नीम के प्रयोग के पीछे भी यह रहस्य है।

रोग प्रतिकारक बढ़ती है शक्ति चैत्र मास में 15 दिन नमक का त्याग किया जए तो यह बहुत ही लाभप्रद होता है। यह एक प्रकार का व्रत है। इस व्रत के करने पर रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है। साथ ही इस व्रत के पालन से आमतौर पर स्वास्थ्य अनुकूल रहता है। पुराणों में बताया गया है कि इस समय ग्रहों के राजा सूर्य के साथ सभी ग्रहों और ऋतुओं का सम्मेलन होता है जिससे संवत् का प्ररूप तैयार होता है। इन दिनों नमक का त्याग करने से सभी ग्रहों का शुभ प्रभाव शरीर पर होता है।

इस तरह के खाने से करें परहेज चैत्र के महीने में अधिक तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज रखना चाहिए। इस समय ऋतुओं का संक्रमण होता है जिससे इस दौरान पाचन शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे में चैत्र के महीने में अधिक तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज रखने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

इस तरह के दूध से बचें चैत्र महीने में सादा दूध नहीं पीना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार इससे पेट में कीड़े उत्पन्न होते हैं। चैत्र महीने में अगर दूध पीना हो तो उसमें मिसरी या गुड़ मिलाकर पीना चाहिए। इससे दूध पीने से नुकसान नहीं होता है। शास्त्रों यह भी कहा गया है कि अगर बुखार हो जाए तो दूध का सेवन तो इस समय बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। वैसे इस मामले में चिकित्सक की राय भी जरूर लें।

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