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Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन करें स्कंदमाता की पूजा, जानें विधि, मंत्र एवं आरती

चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित होता है. स्कंदमाता का अर्थ है स्कंद की माता. भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद कुमार है. चैत्र शुक्ल पंचमी को विधि विधान से स्कंदमाता की पूजा करते हैं. चार भुजाओं वाली स्कंदमाता सिंह पर सवार होती हैं, उनकी गोद में स्कंद कुमार विराजमान रहते हैं. स्कंदमाता अपनी अपने हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक हाथ से स्कंदकुमार को पकड़े हुए दिखाई देती हैं, जबकि एक हाथ वरदमुद्रा में होता है. स्कंदमाता की पूजा करने से मूर्ख भी ज्ञानी हो जाते हैं, भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है. आइए जानते हैं स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, आरती एवं मुहूर्त के बारे में.

स्कंदमाता का पूजा मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 05 अप्रैल दिन मंगलवार को 03:45 पीएम से हुआ है, जो आज शाम 06:01 बजे तक रहेगी. ऐसे में पांचवी तिथि आज मान्य है. आज आयुष्मान योग सुबह 08:38 बजे तक है और उसके बाद सौभाग्य योग शुरु हो जाएगा.

आज सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन है और रवि योग रात 07:40 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 06:05 बजे तक है. ऐसे में आप आज सुबह से ही स्कंदमाता की पूजा कर सकते हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग में स्कंदमाता की पूजा करना अत्यधिक फलदायाी और कल्याणकारी है. इस दौरान पूजा करने से कार्यों में सफलता प्राप्त होगी.

स्कंदमाता का प्रार्थना मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

स्कंदमाता का पूजा मंत्र
ओम देवी स्कन्दमातायै नमः

स्कंदमाता की पूजा विधि

आज सुबह स्नान आदि के बाद मां दुर्गा को स्मरण करके स्कंदमाता की पूजा अक्षत्, धूप, दीप, गंध, कुमकुम से करें. उनको गुड़हल का फूल अर्पित करें और केले का भोग लगाएं. स्कंदकुमार की भी पूजा करें. इस दौरान ऊपर दिए गए पूजा मंत्र और प्रार्थना मंत्र का उच्चारण करें. पूजा के अंत में स्कंदमाता की आरती करें.

स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंद माता,
पांचवा नाम तुम्हारा आता।

सब के मन की जानन हारी,
जग जननी सब की महतारी।

तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं,
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।

कई नामों से तुझे पुकारा,
मुझे एक है तेरा सहारा।

कहीं पहाड़ों पर है डेरा,
कई शहरो मैं तेरा बसेरा।

हर मंदिर में तेरे नजारे,
गुण गाए तेरे भगत प्यारे।

भक्ति अपनी मुझे दिला दो,
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दों

इंद्र आदि देवता मिल सारे,
करे पुकार तुम्हारे द्वारे।

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए,
तुम ही खंडा हाथ उठाए।

दास को सदा बचाने आई,
‘चमन’ की आस पुराने आई।

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