इन 4 चीजों में मनुष्य को कभी भी नहीं करनी चाहिए शर्म, तभी हर कोई करेगा आपकी तारीफ

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार इस चीज पर आधारित है कि मनुष्य को इन चार चीजों को लेकर कभी भी शर्म नहीं करनी चाहिए।

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‘चार चीजों में मनुष्य को कभी भी शर्म नहीं करनी चाहिए। पुराने कपड़ों में, गरीब साथियों में, बूढ़े माता पिता में और सादे रहन सहन में।’ आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि मनुष्य को कभी भी इन चार लोगों को अपना कहने में शर्म नहीं करनी चाहिए। अगर आप ऐसा कर लेंगे तो आपका व्यक्तित्व ऐसा बन जाएगा कि हर कोई आपकी मिसाल देगा। ये चार चीजें हैं- पुराने कपड़ों में, गरीब साथियों में, बूढ़े माता पिता में और सादे रहन सहन में।

असल जिंदगी में अक्सर ऐसा होता है कि लोग कुछ चीजों को दुनिया के सामने अपनाने से हिचकिचाते हैं। ये चीजें आपकी निजी जिंदगी में तो होती हैं लेकिन आपको उन्हें दूसरों के सामने अपना कहने या जिस तरह के आप हैं उस तरह से सबके सामने जाने से अपने मान सम्मान पर चोट लगने जैसा प्रतीत होता है। सबसे पहले बात करते हैं पुराने कपड़ों की। कई बार लोग सभा में पुराने कपड़े पहनकर जाने से डरते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि सामने वाला उनके कपड़ों को देखकर क्या कहेगा। अगर आप भी यही सोच रखते हैं तो उसे तुरंत बदलिए। कपड़े जीवन में मायने रखते हैं लेकिन आपने पुराना कपड़ा पहना है या फिर नया इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इससे पड़ता है आपने उसे कैरी किस तरह से किया है।

दूसरा है गरीब साथियों में। आपके लिए ये जरूरी नहीं होना चाहिए कि आपका दोस्त गरीब है। आपके लिए बस ये मैटर करना चाहिए कि वो कितना सच्चा है। सच्चा दोस्त बड़ी मुश्किलों से मिलता है। इसलिए वो भले ही गरीब क्यों ना हो उसका सम्मान करें और दुनिया के सामने खुलकर कहें कि मेरा दोस्त ये है।

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तीसरा है बूढ़े माता पिता में। माता पिता का होना जीवन में सबसे बड़ी पूंजी हैं। उनका हमेशा सम्मान और उन्हें प्यार देना चाहिए। हर कोई उम्र के साथ बूढ़ा होता चला जाता है। लेकिन पेरेंट्स के मान सम्मान पर उसका कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उनकी हमेशा इज्जत करनी चाहिए।

चौथा है सादा रहन सहन। अगर किसी का रहन सहन आपके जितना तड़क भड़क वाला नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप उससे दूर भागे। हर इंसान का रहने का अपना तरीका होता है। अगर आप भी इन चारों चीजों में से कोई भी काम करते हो तो उसे तुरंत छोड़ दें। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतwww.indiatv.in
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