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हर मनुष्य के जीवन का सार जुड़ा होता है इन 2 शब्दों में, अगर समझ गए तो कहलाएंगे सफल

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार प्यार और लगाव पर आधारित है।

‘प्यार और लगाव में बहुत अंतर होता है। प्यार आपको आजाद करता है और लगाव आपको कमजोर करता है।’ आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के कथन का अर्थ है कि प्यार और लगाव दोनों अलग-अलग होता है। हालांकि कई लोग इन दोनों चीजों में अंतर करने में गलती कर देते हैं। आचार्य चाणक्य के कहने का तात्पर्य है कि प्यार और लगाव में बहुत बड़ा अंतर होता है। प्यार आपको हर बंधन से आजादी प्रदान करता है जबकि लगाव आपको कमजोर बना देता है।

असल जिंदगी में मनुष्य कई सारे रिश्तों की डोर से बंधा हुआ होता है, ये सभी रिश्ते लोगों के दिल के करीब होते हैं। जैसे कि माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त। ये सभी रिश्ते इंसान को अंदर से मजबूत बनाते हैं। इन रिश्तों में आपको प्यार भी मिलता है और लगाव भी। लेकिन कई बार लोग प्यार को भी लगाव का नाम दे देते हैं। दरअसल, इन दोनों में ही बहुत थोड़ा अंतर होता है।

उदाहरण के तौर पर प्यार एक ऐसी चीज है जो इंसान को किसी भी बंधन से मुक्त कर देता है। फिर चाहे वो बंधन कोई भी क्यों ना हो। अगर एक बच्चा पढ़ने में बहुत अच्छा होता है और उसे बाहर पढ़ने का ऑफर आता है, ऐसे में उसके परिवार जन उसके भविष्य के बारे में सोचकर बाहर जाने देते हैं तो वो प्यार है। वो ये जानते हैं कि अगर उनका बच्चा बाहर जाएगा तो उसका भविष्य उज्जवल ही होगा। वहीं इसके विपरीत अगर वो उसे सिर्फ इसलिए नहीं जाने देते कि वो उसके बगैर कैसे रहेंगे तो वो लगाव है। ये वही लगाव है जो उन्हें अंदर से कमजोर कर रहा है और अपने बच्चे को बाहर भेजने से रोक रहा है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि ‘प्यार और लगाव में बहुत अंतर होता है। प्यार आपको आजाद करता है और लगाव आपको कमजोर करता है। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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