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कांग्रेस: सुरजेवाला को पीठ दर्द, वेणुगोपाल बाहर, पार्टी की मीटिंग से क्यों दूर रहे राहुल के ‘आंख-कान’

शनिवार को कांग्रेस की अंतर्कलह को खत्म करने के लिए हुई कांग्रेस की बैठक की कई समीक्षाएं बताई जा रही है. माना जा रहा है कि इस बैठक में कांग्रेस के असंतुष्टों की बात सोनिया गांधी ने काफी विस्तार से सुनी. कहा जा रहा है कि इस बैठक के बाद राहुल गांधी के एक बार फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है. आइए जानिए TMC के खिलाफ वोट दिया तो खून की नदी बहेगी.

बता दें कि राहुल गांधी ने जिस दिन से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है, इसके बाद कांग्रेस की बड़ी बैठकों में एक कॉमन फैक्टर देखने को मिला करता था. इस बैठक में दो ऐसे नेता मौजूद रहते थे जिन्हें 12 तुगलक लेन की आंख और कान माना जाता है. बता दें कि 12 तुगलक लेन राहुल गांधी का आवास है.

नहीं मौजूद थे सुरजेवाला-वेणुगोपाल

हालांकि शनिवार की इस अहम मीटिंग में कांग्रेस के तमाम नेता मौजूद थे. अगर कोई मौजूद नहीं थे तो वे थे ये वो नेता जिन्हें राहुल गांधी का आंख और कान कहा जाता है. इन दो बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी से मीटिंग में कई लोगों के कान खड़े हो गए और कई नेताओं-पत्रकारों के बीच अंदरखाने एक बार फिर चर्चा हुई कि क्या पार्टी में अब भी सब कुछ ठीकठाक है.

कल की मीटिंग से गायब रहने वाले ये दो अहम नेता और राहुल गांधी के लेफ्टिनेंट थे कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल. इन नेताओं की गैरहाजिरी कई कयासों को जन्म दे गई.

सुरजेवाला ने कहा था-मामूली कलह

बता दें कि सुरजेवाला मीटिंग से उस वक्त गायब रहे जब मात्र एक दिन पहले ही उन्होंने कांग्रेस की अंतर्कलह को मामूली कहकर टालने की कोशिश की थी. जबकि इस ‘मामूली’ कलह को सुलझाने के लिए सोनिया को सक्रिय होना पड़ा और उन्होंने मीटिंग बुलाई.

शुक्रवार को रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया था कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और शनिवार की जिस मीटिंग के बारे में इतनी चर्चा की जा रही है वैसी कई बैठकें कांग्रेस अध्यक्ष आने वाले दिनों में करने वाली हैं. सुरजेवाला के इस बयान ने असंतुष्ट नेताओं को और भी भड़का दिया था.

सुरजेवाला के इस बयान के अगले ही दिन यानी शनिवार को हुई कांग्रेस की अहम बैठक में वह शामिल नहीं हुए. जबकि कोई और मौका होता तो सुरजेवाला ही मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखा करते थे, लेकिन कल ऐसा नहीं हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को सुरजेवाला तेज पीठ दर्द से जूझ रहे थे इसलिए वे मीटिंग में नहीं आ सके. जबकि केसी वेणुगोपाल निजी काम की वजह से दिल्ली से बाहर थे.

आजाद ने किया था सुरजेवाला पर तंज

हालांकि जैसा कहा जा रहा है वैसा ही सब कुछ नहीं है. शनिवार को जब मीटिंग खत्म होने को थी तो गुलाम नबी आजाद को सुरजेवाला पर तंज कसते हुए सुना गया, “जब सब कुछ ठीक ही था तो मीटिंग बुलाई ही क्यों गई, और बुलाई भी गई तो ये पांच घंटे तक क्यों चली.” आजाद ने कांग्रेस नेताओं की नई और पुरानी पीढ़ी के बीच पनपी खाई की भी चर्चा की और कहा कि अब पार्टी को एक होने की जरूरत है.

प्रियंका ने कही ये बात

असंतुष्ट नेताओं का एक बड़ा धड़ा मानता है कि कुछ नेताओं ने उनकी मंशा पर सवाल खड़े कर उनके दुख को और भी बढ़ा दिया है. इसकी वजह जी-23 की प्रतिष्ठा भी धूमिल हुई है. बता दें कि मीटिंग में प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पार्टी में आंतरिक संवाद को मजबूत करने पर जोर दिया.

चर्चा ये है कि इस मीटिंग से इन दो नेताओं की गैरमौजूदगी इस वजह से सुनिश्चित की गई थी क्योंकि पार्टी हाईकमान चाहता था कि असंतुष्ट नेता अपने मन की बात को बिना झिझक, बगैर लाग लपेटकर खुलकर बोलें. इन दो नेताओं की मौजूदगी और राहुल से उनकी निकटता की वजह से इन्हें अपनी बात खुलकर कहने में झिझक हो सकती थी. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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