कोरोना के साथ जीना है जरूरी, आइये जानते हैं कब तक जा सकती है ये बीमारी

कोरोना संकट का अभी तक पूरी दुनिया के वैज्ञानिक मिलकर कोई ठोस उपाय नहीं निकाल पाएं हैं। ज्योतिषशास्त्र के अलग-अलग माध्यमों की जानकारी रखने वाले ज्योतिषी भी इस विषय पर अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं। साल 2018 में मिसेज एशिया वुमन ऑफ यूनिवर्स रह चकीं नवनिधि के वाधवा जो न्यूमरोलॉजिस्ट भी हैं उनकी गणना भी यही कह रही है कि अभी दुनिया को कोरोना के संग जीना सीख लेना होगा।

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राहु का साल 2020
इनका कहना है कि इस वर्ष का योग 4 आता है। संख्या चार राहु के अधीन होता है। न्यूमोरोलॉजी वर्ल्ड में सबसे ज्यादा खतरा अप्रैल महीने में माना जा रहा था, क्योंकि साल का योग चार और महीने का अंक भी 4 था। अंकों के आधार पर की जाने वाली भविष्यवाणी में अप्रैल महीने को सबसे खतरनाक माना जा रहा था। अब हमने इस खतरनाक महीने को देख लिया है।

इसलिए कफ और गले की परेशानी
दरअसल, राहु की प्रवृति भ्रम पैदा करने वाली मानी जाती है। राहु के पास महज सिर है शरीर नहीं, इसलिए इसे अस्थ‌िरता और भय का कारक मानते हैं। जब राहु का प्रभाव अधिक होता है तो यह समाज में अनदेखी चीजों को लेकर भय पैदा करता है। दुर्भाग्य से कोरोना के अक्षरों का जब न्यूमरोलॉजी के तहत आंकिक गणना करते हैं तो दो आता है। इस साल के अक्षर में अंक दो, दो बार आता है। इन सब का योग चंद्र के प्रभाव को बढ़ाता है। चंद्रमा हमेशा ठंडा ग्रह माना जाता है। जब यह भारी होता है तो लोगों में आंख, कान, नाक, गले से संबंधित परेशानी बढती है।

कोरोना का जन्म चीन से क्यों?
एक दिलचस्प आंकड़ा यह भी है कि चीन के एल्फाबेटिकल योग 8 है और 8 शनि का अंक होता है। इसलिए इस महामारी का केंद्र चीन को माना जा रहा है। इसका प्रभाव भी दुनिया में तब बढ़ा जब शनि अपनी राशि मकर में जनवरी में आया था। नवनिधि वाधवा के अनुसार साल 2022 तक राहु का प्रभाव पूरी दुनिया पर मंडराता रहेगा। इसमें कोरना समेत कुछ अन्य खतरों को लेकर पूरी दुनिया को सतर्क रहना होगा।

सुधरेंगे हालात, कोरोना से मिलेगी राहत
वैसे इस साल सितंबर में हालात थोड़े सुधर सकते हैं, इसकी वजह यह है कि‌ 9 नंबर को वारियर का नंबर मानते हैं। दूसरी बात यह है सितंबर में राहु केतु का राशि परिवर्तन भी होने जा रहा है।