कोरोना से कब मिलेगी मुक्ति, शेयर बाजार का कैसा रहेगा हाल, जानें क्या कहते हैं सितारे

इन दिनों पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का खौफ बना हुआ है। भारत में भी इस खतरनाक वायरस ने भी अपने पांव फैलाने शुरू कर दिए हैं और 50 से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि चीन, इरान, इटली में मौत बांटने वाला यह वायरस भारत में कितना खतरनाक हो सकता है, आखिर इस वायरस से कब मिलेगी मुक्ति। इस विषय में ज्योतिषी गणना क्या कहती है, कब तक इस वायरस का कोप भारत से समाप्त होगा और शेयर बाजर को मजबूती कब मिलेगी, इस विषय में बता रहे हैं ज्योतिषशास्त्री सचिन मल्होत्रा।

मेदिनी ज्योतिष में राहु-केतु को सूक्ष्म जीवों यानी वायरस के कारण फैलने वाली महामारी का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु को जीव और अर्थव्यवस्था का कारक और शनि को आम जनता का कारक ग्रह माना गया है। गोचर में जब यह ग्रह, विशेष रूप से किसी बड़े ग्रहण के समय, पीड़ा में हों तब महामारी से आम जनता को कष्ट पहुंचता है। वर्ष 2002-2003 में फैली सार्स महामारी के समय गोचर में शनि राहु से युत थे तो 2009 में फैले स्वाइन फ्लू के समय राहु और गुरु की युति थी।

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धनु राशि में पड़े उस ग्रहण के बाद चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने अब वैश्विक महामारी का रूप ले लिया है। ग्रहण के समय से लेकर अब तक जीव कारक ग्रह गुरु केतु के साथ धनु राशि में युति कर रहे हैं। बीते 7 फरवरी से मंगल ने भी धनु राशि में डेरा जमा रखा है जिसके कारण कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया के 100 से अधिक देशों में बना हुआ है। और इस वैश्विक महामारी से तकरीबन 5000 लोग प्राण गवां चुके हैं।

भारत को कोरोना से राहत देंगे ये 2 ग्रह

22 मार्च की रात मंगल धनु राशि में केतु के चंगुल से आजाद होकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके कुछ दिन बाद ही 30 मार्च को गुरु भी केतु का साथ छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इन दोनों बड़े ग्रहों का केतु की युति से मुक्त होकर मकर राशि में चले आना कोरोना वायरस के प्रकोप को कुछ कम करेगा। भारत के लिए स्थिति विशेषरूप से राहत देने वाली होगी क्योंकि आजाद भारत की कुंडली में मकर राशि नवम स्थान में पड़ती है जो कि एक शुभ भाव है।

वृषभ लग्न की भारत की कुंडली में नवम भाव में आकर मंगल और गुरु की शनि से युति होगी जो कि महामारी के रूप में फैले कोरोना के प्रकोप को कम करेंगे। बाद में 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश और 26 अप्रैल को बुध के भी मेष राशि में आकर सूर्य से युति करने के साथ तापमान में तेजी से वृद्धि होगी और भारत को कोरोना के कहर से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन यूरोप, चीन और अमेरिका में कोरोना का असर केतु के आगामी सितंबर महीने में धनु राशि में गोचर करने तक बना रह सकता है।

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शेयर बाजार में मंदी कब तक

मकर राशि में गोचर कर रहे धन के कारक गुरु 29 मार्च के बाद फिर से स्टॉक मार्केट में बड़ा कहर बरपा सकते हैं। गुरु की शनि के साथ युति या समसप्तक योग के समय वैश्विक अर्थव्यस्था में इससे पहले भी 1989, 2002 और 2009 में भी मंदी के प्रभाव देखे गए थे। इस बार भी कुछ ऐसा ही हाल रह सकता है। अप्रैल के महीने से सोने के कारक ग्रह गुरु के अपनी नीच राशि में होने के कारण इस कीमती धातु के दामों में तेजी आएगी। पेट्रोल और डीजल के कारक शनि अपनी राशि मकर में रहकर पेट्रोलियम की कीमत में गिरावट लाएंगे।