‘देशी’ गाय को आखिर क्यों प्रमोट कर रहे हैं CM योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘देशी’ गायों के प्रति रुचि और उनके संरक्षण तथा संवर्धन के लिए पहल के पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी हैं. यदि किसी परिवार में ‘देशी’ गाय है, तो सदस्य स्वस्थ होते हैं क्योंकि विदेशी नस्ल की गाय के दूध की तुलना में इसका दूध अधिक पौष्टिक होता है. दूसरा, जैविक खेती के लिए जरूरी कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट सिर्फ ‘देशी’ गाय के गोबर और गोमूत्र से ही मिलता है. आइए जानिए ब्रेकफास्ट से पहले ऐसे करें दालचीनी का सेवन.

यदि लोग जैविक खेती में और अन्य उप-उत्पादों को बनाने के लिए गौशालों से गाय से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल करना शुरू करते हैं, तो ये गौशाले सरकार के इरादों के अनुसार समय के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन जाएंगे.

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यहां यह भी उल्लेख किया जाना है कि पहली बार, एक मुख्यमंत्री ने ‘देशी’ गायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और 22 नवंबर को गोपाष्टमी का त्योहार राज्यव्यापी उत्सव के रूप में मनाया गया.

विदेशी नस्ल के गायों का दूध हानिकारक

विदेशी नस्ल की गायों का दूध, जिसे हम आमतौर पर अपने दैनिक आहार के रूप में इस्तेमाल करते हैं लेकिन यह लाभकारी होने के बजाए हानिकारक अधिक है. इन गायों का दूध A-1 प्रकार का होता है जिसमें बीटा-कैसोमोर्फिन होता है और एक लीटर दूध में 24-32 ग्राम कैसिइन होता है. इसमें बीटा-कैसोमोर्फिन का दो चम्मच (9.12 ग्राम) भी शामिल होता है. इसका उपभोग गठिया, टाइप -1 डायबिटीज, कई तरह के हृदय रोगों, कोलाइटिस, पार्किंसन और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों के प्रति संवेदनशील बनाता है.

‘देशी’ गाय का दूध फायदेमंद

दूसरी ओर, रिसर्च बताते हैं कि ‘देशी’ गाय का दूध ज्यादा फायदेमंद होता है. देशी गाय का दूध A-2 प्रकार का होता है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. इस गाय की 22 प्रजातियों पर नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) की एक रिसर्च में पाया गया कि अधिकांश दूध उत्पादक गाय की प्रजातियों में से पांच (लाल सिंधी, शाहीवाल, थारपारकर, गिर और राठी) ए- 2 प्रकार की 100 फीसदी थीं.

जबकि अन्य प्रजातियों में, यह मात्रा 94 प्रतिशत तक है, लेकिन जर्सी और विदेशी नस्लों की फ्राइजियन प्रजातियों में यह महज 60 प्रतिशत तक है.

डीएनए में बदलाव का कारण

गाय का उद्गम मध्य पूर्व एशिया माना जाता है. जब गाय यूरोप पहुंचीं, और यह जगह अपेक्षाकृत ठंडी थी, लगभग 8 से 10,000 साल पहले, उनके डीएनए में क्रमिक परिवर्तनों के कारण, उनका दूध भी ए- 2 से ए -1 में बदल गया.

गाय के दूध में पोषक तत्व पाए जाते हैं. दूध में एमिनो एसिड-21, फैटी एसिड-6, विटामिन-बी 6, एंजाइम-8, मिनिरल्स-25 और फॉस्फोरस के यौगिक-4. इसके अतिरिक्त ए-2 दूध में अपेक्षाकृत उच्च ओमेगा-6 फैटी एसिड भी होता है.

यही कारण है कि अब तक लगभग 7,000 ‘देशी’ गायों को किसानों को और 1,017 कुपोषित बच्चों के परिवारों को वितरित किया गया है. सरकार प्रति माह 900 रुपये रखरखाव शुल्क भी दे रही है.

ज्यादा दूध देती हैं ‘देशी’ गायें

उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के पूर्व जोनल निदेशक डॉ बीके सिंह का कहना है कि श्वेत क्रांति के लिए अपनाई गई असंगित ब्रीडिंग पॉलिसी ने न केवल हमारे स्वास्थ्य को खतरे में डाला, बल्कि इसने ‘देशी’ गाय को भी प्रभावित किया.

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वास्तव में, सबसे अधिक दूध उत्पादन का रिकॉर्ड गाय की गिर प्रजाति के नाम पर है, लेकिन दुर्भाग्य से, यह रिकॉर्ड ब्राजील के नाम पर है और यह ‘देसी’ गाय की ही एक नस्ल है. शेरा नाम की गाय एक दिन में रिकॉर्ड 62.33 लीटर दूध देती है. जबकि इसी गाय का पहले एक दिन में 59.947 लीटर दूध देने का रिकॉर्ड था.

ब्राजील में, एक गिर गाय एक बछड़े के अलावा दूध देने की अवधि के एक चक्र में करीब 5,500 लीटर दूध देती है. जबकि भारत में यह औसत केवल 980 लीटर है. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

स्रोतwww.aajtak.in
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