भगवान गणेश के 14 स्वरूपों के बारे में जानते हैं आप? वास्तु दोष करते हैं समाप्त

हिंदू शास्त्रों में बुधवार (Wednesday) का दिन गणपति बप्पा (Ganapati Bappa) का बताया गया है. इसलिए बुधवार के दिन भगवान गणेश (Lord Ganesha) को खुश करने के लिए उनकी आराधना की जाती है. इस दिन उनकी पूजा करने से जातकों के सारे संकट दूर हो जाते हैं. गणपति बप्पा सभी देवों में सर्वप्रथम पूजनीय हैं. हर एक पूजा से पहले उनकी पूजा होती है तभी वह पूजा मान्य होती है. वास्तु शास्त्र में गणपति की मूर्ति एक, दो, तीन, चार और पांच सिरों वाली पाई जाती है. इसी तरह गणपति के 3 दांत पाए जाते हैं. सामान्य रूप से 2 आंखें पाई जाती हैं लेकिन तंत्र मार्ग संबंधी मूर्तियों में तीसरा नेत्र भी देखा गया है.

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भगवान गणेश की मूर्तियां 2, 4, 8 और 16 भुजाओं वाली भी पाई जाती हैं. 14 प्रकार की महाविद्याओं के आधार पर 14 प्रकार की गणपति प्रतिमाओं के निर्माण हर तरह का वास्तु दोष दूर करने में सहायक है. आइए आपको बताते हैं कैसे.

  1. संतान गणपति- भगवान गणपति के 1008 नामों में से संतान गणपति की प्रतिमा उस घर में स्थापित करनी चाहिए जिनके घर में संतान नहीं हो रही हो. वास्तु के अनुसार वे लोग संतान गणपति की विशिष्ट मंत्र पूरित प्रतिमा द्वार पर लगाएं जिसका प्रतिफल सकारात्मक होता है.
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  1. विघ्नहर्ता गणपति- मान्यता है कि विघ्नहर्ता भगवान गणपति की प्रतिमा उस घर में स्थापित करनी चाहिए, जिस घर में कलह, विघ्न, अशांति, क्लेश, तनाव, मानसिक संताप जैसे दुर्गुण होते हैं. पति-पत्नी में मनमुटाव, बच्चों में अशांति का दोष पाया जाता है. ऐसे घर में प्रवेश द्वार पर मूर्ति स्थापित करनी चाहिए.
  2. विद्या प्रदायक गणपति- वास्तु के अनुसार बच्चों में पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी पैदा करने के लिए गृहस्वामी को विद्या प्रदायक गणपति अपने घर के प्रवेश द्वार पर स्थापित करना चाहिए.
  3. विवाह विनायक- गणपति के इस स्वरूप का आह्वान उन घरों में विधि-विधानपूर्वक होता है, जिन घरों में बच्चों के विवाह जल्द तय नहीं होते.
  1. चिंतानाशक गणपति- जिन घरों में तनाव व चिंता बनी रहती है, ऐसे घरों में चिंतानाशक गणपति की प्रतिमा को ‘चिंतामणि चर्वणलालसाय नम:’ जैसे मंत्रों का सम्पुट कराकर स्थापित करना चाहिए.
  2. धनदायक गणपति- आजकल सभी घरों में गणपति के इस स्वरूप वाली प्रतिमा को मंत्रों से सम्पुट करके स्थापित किया जाता है ताकि उन घरों में दरिद्रता का लोप हो, सुख-समृद्धि व शांति का वातावरण कायम हो सके.
  3. सिद्धिनायक गणपति- वास्तु के अनुसार कार्य में सफलता व साधनों की पूर्ति के लिए सिद्धिनायक गणपति को घर में लाना चाहिए.
  4. सुपारी गण‍पति- आध्यात्मिक ज्ञानार्जन हेतु सुपारी गण‍पति की आराधना करनी चाहिए.
  5. शत्रुहंता गण‍पति- शत्रुओं का नाश करने के लिए शत्रुहंता गणपति की आराधना करना चाहिए.
  6. आनंददायक गणपति- वास्तु के अनुसार परिवार में आनंद, खुशी, उत्साह व सुख के लिए आनंददायक गणपति की प्रतिमा को शुभ मुहूर्त में घर में स्‍थापित करना चाहिए.
  7. विजय सिद्धि गणपति- मुकदमे में विजय, शत्रु का नाश करने, पड़ोसी को शांत करने के उद्देश्य से लोग अपने घरों में ‘विजय स्थिराय नम:’ जैसे मंत्र वाले बाबा गणपति की प्रतिमा के इस स्वरूप को स्था‍पित करते हैं.
  8. ऋणमोचन गणपति- कोई पुराना ऋण, जिसे चुकता करने की स्थिति में न हो, तो ऋण मोचन गणपति घर में लगाना चाहिए.
  9. रोगनाशक गणपति- कोई पुराना रोग हो, जो दवा से ठीक न हो रहा हो, उन घरों में रोगनाशक गणपति की आराधना करनी चाहिए.
  10. नेतृत्व शक्ति विकासक गण‍पति- वास्तु के अनुसार राजनीतिक परिवारों में उच्च पद प्रतिष्ठा के लिए लोग गणपति के इस स्वरूप की आराधना इन मंत्रों से करते हैं- ‘गणध्याक्षाय नम:, गणनायकाय नम: प्रथम पूजिताय नम:

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स्रोतhindi.news18.com
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