शुक्रवार और एकादशी का योग, इस दिन आंवले के साथ-साथ बाल गोपाल की भी पूजा करें

एकादशी पर सुंगधित फूलों के जल से स्नान कराएं बाल गोपाल को, पूजा में अर्पित करें पीले वस्त्र

शुक्रवार, 6 मार्च को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मान्यता है कि आंवला भी भगवान विष्णु का ही एक स्वरूप है। इसी वजह से इस एकादशी पर आंवले की पूजा करने की परंपरा है। एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत किया जाता है। इस तिथि पर विष्णुजी और उनके अवतारों की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। यहां जानिए बाल गोपाल यानी श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप कान्हाजी की सरल पूजा विधि…

एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद गणेशजी की विधिवत पूजा करें। इसके बाद श्रीकृष्ण की पूजा में आचमन करें यानी पूजा से पहले हाथों को जल से धोना। बाल गोपाल की पूजा में सबसे पहले खुद हाथ साफ जल से धोएं, इसके बाद श्रीकृष्ण के हाथों के लिए जल अर्पित करें। इसके लिए सुंगधित फूलों वाले जल का उपयोग करना चाहिए। सुगंधित जल से ही बाल गोपाल को स्नान कराएं।

> बाल गोपाल के साथ ही गौमाता की मूर्ति भी रखनी चाहिए। श्रीकृष्ण को गौमाता विशेष प्रिय हैं, इसीलिए एकादशी पर गौमाता की पूजा भी करें।

> श्रीकृष्ण के लिए सुंदर आसन का उपयोग करना चाहिए। इसका रंग तेज और चमकीला, जैसे लाल, पीला, नारंगी हो तो सबसे अच्छा रहता है। भगवान को पीतांबरधारी कहा जाता है, इसीलिए उन्हें पीले वस्त्र चढ़ाना चाहिए।

> श्रीकृष्ण के पैर धोना चाहिए और जिस बर्तन में पैर धोए जाते हैं, उसे पाद्य कहा जाता है। पूजा से पहले पाद्य में स्वच्छ जल और फूलों की पंखुड़ियां डालें और उससे भगवान के चरणों को धोएं। दूध, दही, घी, शहद और चीनी को एक साथ मिलाकर पंचामृत बनाएं। किसी शुद्ध बर्तन में भरकर भगवान को भोग लगाएं। ध्यान रखें श्रीकृष्ण को तुलसी के बिना भोग नहीं लगाना चाहिए।

> पूजा में भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र कृं कृष्णाय नम: का जाप करते रहना चाहिए।

> दूर्वा, कुमकुम, चावल, अबीर, सुगंधित फूल और शुद्ध जल को पंचोपचार कहा जाता है। श्रीकृष्ण की पूजा में इन सभी का होना आवश्यक है।

> श्रीकृष्ण की पूजा में जो भोग लगाया जाता है, उसमें ताजे फल, मिठाइयां, लड्डू, मिश्री, खीर, तुलसी के पत्ते और फल शामिल होते हैं। बाल गोपाल की पूजा में गाय के दूध से बने घी का उपयोग करना चाहिए। दीपक के लिए भी इसी घी का उपयोग करना चाहिए।