जीवन में पाना चाहते हैं सफलता तो भगवान गणेश से सीखें ये 5 गुण​

हिंदू धर्म में 33 कोटि देवताओं का जिक्र किया गया है. हर देवता अपने अद्वितीय एवं विलक्षण गुणों की वजह से अपने भक्तों के प्रिय बन जाते हैं. आमतौर पर हम भगवान की पूजा-आराधना कर उनके भीतर के गुणों को अनदेखा कर देते हैं. अगर हम अपने आराध्य में मौजूद असंख्य गुणों में से कुछ गुणों को भी आत्मसात कर लें तो हमारा जीवन पूरी तरह से बदल सकता है. ऐसे ही गुणों की खान हैं प्रथम आराध्य भगवान गणेश. किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए सबसे पहले लम्बोदर को पूजा जाता है. भगवान गणेश अन्य देवताओं से बिल्कुल अलग हैं. उनका हर गुण हमें जीवन में सफलता का एक मंत्र देता है, अगर हम उनके गुणों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश शूरू कर दें तो जल्द ही सफलता हमारे कदम चूमने लगेगी. हम गणपति बप्पा के ऐसे ही पांच गुणों के बारे में बताएंगे जिन्हें अपनाकर जिंदगी की दशा एवं दिशा को पूरी तरह से बदला जा सकता है.

हर परिस्थिति में खुश रहना

भगवान गणेश के जीवन से जो सबसे ज्यादा जरूरी और बड़ी सीख मिलती है वो है जीवन में हमेशा खुश रहने की. चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो हमेशा खुश रहने की कोशिश की जानी चाहिए. गणपति बप्पा को हमेशा खुश रहने वाले देवता के तौर पर माना जाता है. खुश रहने से बड़ा से बड़ा मुश्किल वक्त भी आसानी से निकल जाता है.

धैर्य बनाए रखना

गणेश जी का जो दूसरा बड़ा गुण है वो है धैर्यवान होने का. किसी भी विपद स्थिति में धैर्य बनाए रखना ही जीवन में सफलता की कुंजी बनता है. हम आज जिंदगी में थोड़ी सी विषम परिस्थितियां आने पर ही धैर्य खो बैठते हैं. इस वजह से कई बार शारीरिक औरआर्थिक के साथ सामाजिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. भगवान गणेश का पूरा जीवन धैर्यपूर्वक निर्णय लेने की सीख देता है.

शांतचित्त रहना

भगवान गणेश के जीवन से जो तीसरा गुण हमें अपने जीवन में उतारने की जरूरत है वो है शांतचित्त बने रहना. शांतचित्त मन में ही आगे बढ़ने के विचार पैदा होते हैं. मन भी उस वक्त सही निर्णय पर पहुंच पाता है जब वह पूरी तरह से शांतचित्त होता है.

बड़े-छोटे में भेद न करना

भगवान गणेश के जीवन को गौर से देखें तो उन्होंने कभी बड़े-छोटे में भेद नहीं किया. जितना उन्हें नंदी से प्यार था उतना ही प्रेम वो मूषकराज से भी करते थे. उनका यह गुण संदेश देता है कि हमारी जिंदगी में आने वाले हर व्यक्ति का बराबर सम्मान करना चाहिए. उनके बीच किसी भी तरह का बड़ा या छोटा
होने का भेद नहीं करना चाहिए.

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विवेकशील होना

प्रथम आराध्य के जीवन से अपने जीवन में उतारने वाला पांचवा और एक और महत्वपूर्ण गुण है विवेकशीलता का. जीवन में सफलता हासिल करने के लिए क्या सही है और सफलता के लिए किसी भी तरह के शॉर्टकट को न अपनाने का निर्णय हमारे विवेक पर ही निर्भर करता है. लंबोदर के इन सभी गुणों को हम अगर अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश अभी से शुरू कर दें तो हमें इस दुनिया में सफलता के एक के बाद एक नई सीढ़ी चढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतhindi.news18.com
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