हनुमान भक्त अमिताभ बच्चन प्रयागराज के इस मंदिर में हर साल करवाते हैं पूजा, जानें कहानी

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) की एक्टिंग के लोग दीवाने हैं. अमिताभ बच्चन की एक झलक के लिए उनके फैंस कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि महानायक अमिताभ बच्चन बहुत बड़े हनुमान (Hanuman Ji) भक्त हैं. प्रयागराज के कोतवाल कहे जाने वाले और संगम तट पर लेटे श्रीराम भक्त हनुमान मंदिर में वह हर साल अरदास लगवाते हैं. आपको बता दें कि यहां के हनुमान जी में बिग बी की गहरी आस्था है. हर साल उनका प्रतिनिधि मुंबई से प्रयागराज आता है और इस मंदिर में पूजा-अर्चना करवाता है. इस तरह से बिग बी इस हनुमान मंदिर में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हैं. दरअसल इस मंदिर से अमिताभ बच्चन का बचपन का नाता है. पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन के साथ बचपन में वह इस मंदिर में हर शनिवार और मंगलवार आया करते थे. साथ में उनके छोटे भाई अजिताभ भी होते थे.

साल 1982 में जब कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ घायल हो गए थे और उनकी तबियत बिगड़ गई थी तब बिग बी के पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने इस मंदिर में पूजा-पाठ करवाई थी. यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन हवन करते समय ही पता चला कि अमिताभ अब ठीक हो गए हैं. इस घटना के बाद से ही अमिताभ बच्चन की इस मंदिर और बजरंगीबली के प्रति आस्था और अधिक बढ़ गई और हर साल वह यहां अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहे. अमिताभ के भाई अजिताभ ने भी मंदिर में 51 किलो का पीतल का घंटा लगवाया है.

प्रयागराज का ‘लेटे हनुमान मंदिर’

हनुमान जी का यह प्राचीन मंदिर त्रिवेणी संगम के निकट किला के किनारे स्थित है. इस मंदिर में हनुमानजी की दक्षिणाभिमुखी विशाल मूर्ति है, जो छह-सात फुट नीचे है. मूर्ति का सिर उत्तर और पैर दक्षिण दिशा में है. इसे बड़े हनुमान जी, किला के हनुमान जी और बांध वाले हनुमान जी भी कहा जाता है. यहां मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. मंदिर के बारे में मान्यता है कि हनुमान जी के बाएं पैर के नीचे कामदा देवी और दाएं पैर के नीचे अहिरावण दबा हुआ है. दायें हाथ पर श्रीराम और लक्ष्मण और बाएं हाथ में गदा सुशोभित है. ऐसी मान्यता है कि लेटे हनुमान जी भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं.

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मंदिर की पौराणिक कहानी

लेटे हनुमान मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह मन्दिर लगभग 600-700 वर्ष पुराना है. कहा जाता है कि कन्नौज के एक राजा को कोई संतान नहीं थी. वे संतान प्राप्ति के लिए गुरु के आश्रम गए और गुरु ने आदेश किया कि राजन अपने राज्य में हनुमान की प्रतिमा स्थापित कराएं. इसका स्वरूप ऐसा हो जो पाताल में भगवान राम को छुड़ाने के लिए गये थे और यह विग्रह कहीं और से नहीं विंध्य पर्वत से बनवाकर लाया जाए. तब राजा कन्नौज से विंध्याचल पर्वत की ओर गए और वह इस प्रतिमा को स्वरूप देकर नाव के द्वारा अपने राज्य में लेकर आए. लाते समय रास्ते में प्रयागराज का क्षेत्र आया. राजा ने नाव को प्रयाग में घाट पर किनारे लगाकर रात्रि विश्राम का निर्णय लिया. तभी रात को अचानक नाव टूटी और हनुमान जी का विग्रह जलमग्न हो गया. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतhindi.news18.com
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