8 अप्रैल यानी बुधवार को हनुमान प्राकट्योत्सव, इस दिन भगवान को नारियल चढ़ाकर तीन परिक्रमा करें

  • माता सीता ने हनुमानजी को दिया था अमर होने का वरदान, दीपक जलाकर करें सुंदरकांड का पाठ

बुधवार, 8 अप्रैल को हनुमान प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा। त्रेता युग में चैत्र मास की पूर्णिमा पर श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी का जन्म हुआ था। हनुमानजी श्रीराम के परम भक्त हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार हनुमानजी का जन्म मंगलवार को हुआ था, इसी वजह से मंगलवार को हनुमानजी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। जानिए हनुमानजी की जयंती पर पूजा-पाठ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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माता सीता ने दिया था अमरता का वरदान
रामायण में रावण सीता का हरण करके लंका ले गया था। श्रीराम और पूरी वानर सेना सीता की खोज में लगी हुई थी। तब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका पहुंच गए और माता सीता को खोज लिया। लंका की अशोक वाटिका में हनुमानजी और सीता की भेंट हुई थी। उस समय हनुमानजी ने श्रीराम का संदेश देकर माता सीता की सभी चिंताएं दूर की थी। इससे प्रसन्न होकर सीता ने हनुमानजी को अजर-अमर होने का वरदान दिया था। इस वरदान के प्रभाव से हनुमानजी हमेशा जीवित रहेंगे, इन्हें कभी वृद्धावस्था नहीं आएगी।

पूजा से जुड़ी खास बातें
हनुमान जयंती पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद पूजा करें। हनुमानजी को प्रसाद के रूप में गुड़, नारियल, लड्डू चढ़ाया जाना चाहिए। हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। दोपहर में बजरंग बली को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित किया जा सकता है।

शाम के समय फल जैसे केले, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए। सुंदरकांड करते समय हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल और अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित करना चाहिए।

बजरंग बली के श्रृंगार में या चोला चढ़ाते समय तिल के तेल या चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर लगाना चाहिए। भक्त को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।