गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की दिमागी सेहत पर डाल रहा असर, ये लक्षण भी नजर आ रहे

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) ने हमारी जिंदगी को बुरी तरह से प्रभावित किया है. इसकी वजह से पैदा हुए हालातों के चलते बच्चों की खेल मैदान से दूरी बन गई है, वहीं बच्चे अपना ज्यादातर वक्त मोबाइल फोन (Mobile phone)और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (Electronic Gadgets) के साथ बिताने लगे हैं. इसके दुष्परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं. बच्चे गैजेट्स के साथ घंटों वक्त गुजार रहे हैं इससे उनका शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होने लगा है. एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोनाकाल में बच्चों की गैजेट्स से करीबी ने उनके दिमाग को प्रभावित करने के साथ ही कई बीमारियों का खतरा पैदा कर दिया है. आमतौर पर मोटापा, नींद पूरी नहीं होना, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण ज्यादा उम्र के लोगों में दिखाई देते हैं लेकिन इन बीमारियों के लक्षण अब बच्चों में भी सामने आने लगे हैं. कई घंटे तक गैजेट्स के इस्तेमाल से बच्चों के दिमाग की ब्रेन सेल्स भी डेमेज होने का खतरा पैदा हो गया है.

पीडियाट्रीशियन एवं पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर (स्वास्थ्य विभाग, इंदौर) डॉ. शांतिलाल पोरवाल की माने तो बच्चों में मोबाइल और अन्य गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से एकाकीपन की शिकायत बढ़ने लगी है. कई बच्चों के दिमाग पर इनका इतना असर हुआ है कि बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल तक ले जाना पड़ा है. डॉ. पोरवाल के मुताबिक खेल मैदान से दूरी की वजह से सामाजिकता में कमी और ज्यादा गैजेट्स का इस्तेमाल इन बच्चों को आक्रामक बना रहा है. कई बच्चों में चिड़चिड़ापन भी देखा गया है.

मोटापा, नींद न आने की भी शिकायत

एक्सपर्ट्स की माने तो कई बच्चे तो गैजेट्स के साथ 8-10 घंटे तक गुजार रहे हैं. ऐसे बच्चों में मोटापे की शिकायत बढ़ी है. उनमें नींद न आने के साथ ही एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण भी नजर आने लगे हैं. बच्चों के सोशल और इमोशनल बिहेवियर में भी बदलाव देखा गया है. एकाग्रता की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी नजर आ रहा है और वे पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं. उन्हें पढ़ाई से संबंधित छोटी-छोटी चीजें भी समझने में परेशानी आ रही है. उनकी याददाश्त पर भी असर दिख रहा है.

बच्चों में इनडोर एक्टिविटी को दें बढ़ावा

कोरोना महामारी की वजह से अब भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं, जिसके चलते बच्चों का मैदान पर एक्टिव होना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा. ऐसी स्थिति में पेरेंट्स के लिए अब ये जरूरी है कि वे अपने बच्चों की गैजेट्स से दूरी बनाएं और उन्हें इनडोर एक्टीविटी की तरफ मोड़ें. बच्चों का मन शतरंज, लूडो, बैडमिंटन, कैरम जैसे इनडोर गेम्स में लगाने की कोशिश करें. इसके साथ ही उन्हें पूरे दिन में एक घंटे से ज्यादा वक्त तक मोबाइल या कोई अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल न करने दें. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतhindi.news18.com
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