होलिका दहन के वक्त सोने या आलस करने वालों को मिलते हैं बुरे परिणाम, केवल इन तीन लोगों को छूट

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन अंहकार, बुराई और नकारात्मक शक्तियों को पवित्र आग में जला दिया जाता है। जिससे घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। इस बार होलिका दहन 28 मार्च को किया जाएगा। होलिका दहन के दिन कुछ चीजों का जरूर पालन करना चाहिए। इस बारे में विस्तार से गरुड़ पुराण में भी बताया गया है।

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हिंदू धर्म के 18 पुराणों में से एक गरुड़ पुराण में लाइफ मैनेजमेंट को लेकर काफी विस्तार से बताया गया है। इतना ही नहीं व्रत-त्योहार को लेकर कई बातें बारीकी से बताई गई है। इसी तरह होलिका दहन के दिन कुछ ऐसे काम है जिन्हें बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इतना ही यह काम करने की कुछ लोगों को छूट दी जाती हैं। जानिए इन कामों के बारे में विस्तार से।

गरुड़ पुराण के अनुसार होलिका दहन के दिन न करें ये काम

होलिका दहन का वक्त निर्धारित रहता है। पंडित भी योग देखकर होलिका दहन का समय बताते हैं। ऐसे में जब होलिका की पूजा हो रही हो और उसका दहन किया जा रहा हो तो लोगों को घर में सोना नहीं चाहिए। इस समय आलस करना या बिस्तर पर पड़े रहना गरुण पुराण में सर्वथा निषेध कहा गया है।
गरुण पुराण में कहा गया है कि होलिका दहन के शुभ मुहुर्त में बिस्तर पर पड़े रहना या सोना दुर्भाग्य लाता है। इससे व्यक्ति के परिवार में आर्थिक उन्नति के रास्ते खुलते हैं और घर में निगेटिविटी आती है।

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हालांकि गरुण पुराण में तीन तरह के लोगों को होलिका दहन के वक्त इस निषेध से राहत दी गई है। गर्भवती स्त्री, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति असहाय स्थिति में इस दौरान बिस्तर पर लेटते हैं या इस वक्त सो जाते हैं तो उन्हें छूट दी गई है।
इनके अतिरिक्त अगर कोई व्यक्ति आलस या नशे के फेर में सोता रह जाता है तो उसे इसके बुरे परिणाम झेलने की बात गरुण पुराण में कही गई है। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतwww.indiatv.in
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