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पुराने और नए टैक्स स्लैब में कौन है बेहतर, किसमें मिलेगी ज्यादा छूट, जानिए पूरी डिटेल्स

वित्त वर्ष 2020-21 के ल‌िए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की नियत समय-सीमा 31 दिसंबर, 2021 निकल चुकी है. अगर आप आईटीआर दाखिल नहीं कर पाए हैं तो देय तिथि 31 मार्च, 2022 तक बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) भर सकते हैं. किसी वित्त वर्ष के लिए रिटर्न भरने की नियत समय-सीमा खत्‍म होने के बाद करदाताओं (Taxpayer) के पास बिलेटेड आईटीआर भरने का मौका रहता है.

साल 2020 के बजट में टैक्स भरने के दो विकल्प मुहैया कराए गए थे. पुराना और नया टैक्स स्लैब (Old and New Tax Slab). टैक्सपेयर्स अपनी टैक्स देनदारी के हिसाब से दोनों में से किसी एक टैक्स स्लैब का चुनाव कर सकते हैं. क्लीयर के संस्थापक एवं सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है कि नया टैक्स स्लैब दो मायनों में पुराने स्लैब से अलग है. पहला…इसमें कम दर के साथ अधिक स्लैब हैं. दूसरा…नई व्यवस्था अपनाने पर करीब 70 तरह की छूट और कटौती का लाभ नहीं मिलेगा, जो पुराने टैक्स स्लैब में मिलता है.

कौन सा बेहतर…पुराना या नया टैक्स स्लैब

अर्चित गुप्ता का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अपनी आय पर सभी तरह की छूट और कटौती का लाभ उठाने के बाद लागू सामान्य दरों पर टैक्स देनदारी की गणना करनी चाहिए. उदाहरण के लिए, पुराने स्लैब के तहत नौकरीपेशा व्यक्ति एलटीए, एचआरए, स्टैंडर्ड डिडक्शन के लिए 50,000 रुपये की छूट का दावा कर सकता है. इसके अलावा, व्यक्तिगत करदाता हाउसिंल लोन के ब्याज और एनपीएस योगदान आदि पर इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट क्लेम कर सकता है. इसके अलावा, करदाता को नए टैक्स स्लैब के अनुसार अपनी कमाई पर टैक्स देनदारी की गणना चाहिए. इन दोनों की तुलना कर अपने लिए बेहतर टैक्स स्लैब का चुनाव कर सकते हैं.

नए स्लैब में इन्हें मिलेगा फायदा

नई टैक्स व्यवस्था में सबसे अधिक टैक्स सालाना 15 लाख रुपये और उससे अधिक की कमाई पर लगता है. यह व्यवस्था उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद है, जो कम छूट और कटौती क्लेम करते हैं. जो लोग ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं और जिन्होंने टैक्स बचाने के लिए जरूरी निवेश किया है, उन्हें इस व्यवस्था से बहुत लाभ नहीं होगा. जो लोग नए स्लैब की दरों को अपनाना चाहते हैं, उन्हें स्टैंडर्ड डिडक्शन, 80C, 80D, हाउसिंग लोन, एनपीएस जैसी तमाम छूट को छोड़ना होगा.

30 से कम उम्र के लिए नया सिस्टम ठीक

टैक्सपेयर्स की उम्र अगर 30 साल से कम है तो उनके लिए नया टैक्स स्लैब चुनना ही बेहतर होगा. लेकिन इससे ज्यादा उम्र के लोग पुराने सिस्टम में ही बने रहें तो बेहतर होगा. 10 लाख रुपये से कम कमाने वाले लोगों के लिए नया सिस्टम बेहतर हो सकता है. इससे ज्यादा इनकम वालों के लिए पुराने सिस्टम में ही बने रहना ठीक होगा. अगर होम लोन चल रहा है तो होम लोन का रीपेमेंट करना सही रहेगा. ऐसे में डिडक्शन का फायदा मिलेगा. जो लोग बच्चों की स्कूल फीस भरते हैं, उनके लिए पुराने सिस्टम में ही बने रहना ठीक होगा क्योंकि फीस पर टैक्स छूट का फायदा उठाया सकता है.

स्लैब के तहत आप पर असर

कमाई/टैक्स व्यवस्था पुरानी नई

2.5 लाख रुपये तक 00 00

2,50,001 से 5 लाख 5 फीसदी 5 फीसदी

5,00,001 से 7.5 लाख 20 फीसदी 10 फीसदी

7.5 से 10 लाख 20 फीसदी 15 फीसदी

10 लाख से 12.5 लाख 30 फीसदी 20 फीसदी

12,50,001 से 15 लाख 30 फीसदी 25 फीसदी

15 लाख से ज्यादा 30 फीसदी 30 फीसदी

चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

–नौकरीपेशा या पेंशनभोगी, जिसका बिजनेस से कोई आय नहीं है तो वह हर साल नई या पुरानी कर व्यवस्था में किसी एक को चुन सकता है.

-अगर कमाई का स्रोत कोई बिजनेस है तो नई व्यवस्था चुनने के बाद सिर्फ एक ही बार पुरानी कर व्यवस्था में लौट सकते हैं.

-जिनकी सालाना आय पांच लाख रुपये से कम है तो किसी भी व्यवस्था में उन्हें कर का भुगतान नहीं करना है.

-नई व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिक ज्यादा कर छूट नहीं मिलती है. सबके लिए छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये ही है. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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