ये भी करते हैं धोखाधड़ी: बैंकों के नाम पर हो रही है ठगी, ऐसा करने वालों में वेबसाइट और एजेंट भी शामिल

ऐप के जरिए पर्सनल लोन के नाम पर ठगी का मामला सामने आने से रिजर्व बैंक सावधान हो गया है। हालांकि केवल ऐप ही नहीं, बल्कि डायरेक्ट सेल्स एजेंट या ढेर सारी ऐसी वेबसाइट्स भी हैं जो ग्राहकों को बड़े बैंक के नाम से ठगती हैं।

बड़े बैंकों के साथ साझेदारी का झूठा दावा

हाल में निजी सेक्टर के एक बड़े बैंक ने इस तरह की कार्रवाई की है। नई मुंबई के एक डायरेक्ट सेल्स एजेंट (DSA) ने अपनी वेबसाइट पर कई बड़े बैंकों के नाम डाल रखे थे। वेबसाइट ने दावा किया कि इन बैंकों के साथ उसकी साझेदारी है। हालांकि जब बैंकों को शिकायत मिली तो 3-4 बैंकों ने इस वेबसाइट को लीगल नोटिस के जरिए कार्रवाई करने की चेतावनी दी। इसके बाद इस वेबसाइट ने सभी का नाम हटाकर वेबसाइट ही बंद कर दी।

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बैंकों की टीम ऐसे एजेंट या वेबसाइट की छानबीन करती है

इस बारे में दो बड़े बैंकों के अधिकारियों ने कहा कि हम हर साल इस तरह की कार्रवाई करते हैं। हमारी टीम इस तरह की वेबसाइट या DSA की छानबीन करती है। उसके बाद हम कार्रवाई करते हैं। हर साल इस तरह के सैकड़ों मामले आते हैं। हमारा कोई संबंध नहीं होता है फिर भी यह वेबसाइट या DSA या ऐप्स भी हमारे नाम का उपयोग करते हैं।

कई वेबसाइट ऐसे जिन्हें पकड़ पाना मुश्किल है

एक बड़े निजी बैंक के अधिकारी ने कहा कि किसी वेबसाइट या ऐप्स पर बैंकों के नाम को पकड़ पाना काफी मुश्किल है। क्योंकि कुछ वेबसाइट या ऐप्स तो केवल हमारा लोगो ही डालते हैं। इससे और पता नहीं चलता है। रिजर्व बैंक की चेतावनी और ऐप्स के जरिए ग्राहकों के साथ हुई धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद अब बैंक भी सतर्क हो गए हैं। वे पूरी तरह से इसे सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस तरह के मामलों में उनके बैंक का नाम कहीं न हो।

बैंकों का कहना है कि ग्राहकों को सीधे बैंकों से या उनकी वेबसाइट से या उनके किसी आधिकारिक चैनल के जरिए ही लोन लेने की कोशिश करें।

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बैंकों के सेल्स एजेंट भी कर रहे हैं धोखाधड़ी

कई मामले ऐसे भी आए हैं जिसमें कुछ डायरेक्ट सेल्स एजेंट ने बड़े बैंकों के साथ धोखाधड़ी की है। इन एजेंटों ने बिना किसी कागजात के गाड़ियों के लोन बांट दिए। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने पिछले हफ्ते ही नई मुंबई के एक एजेंट की जांच शुरू की है। ईओडब्ल्यू ने 7.5 करोड़ रुपए की ठगी के आरोप में विनोद मिश्रा नाम के शख्स को आरोपी बनाया है। इसके खिलाफ भांडुप पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। उसने पुरानी कारों के लिए गलत कागजात बैंक के पास जमा कराए है और उस पर लोन ले लिया। बाद में यह लोन डिफॉल्ट हो गया।

395 लोगों को लोन दिलाया, इनमें 56 ने किस्तें नहीं दीं

जांच में पता चला कि इस आरोपी ने करीबन 395 लोगों को लोन दिलाया। उसमें से 56 ने लोन की किस्त देना बंद कर दिया। इसी के बाद बैंक ने जांच शुरू की तो पता चला कि जिस गाड़ी के लिए लोन लिया गया, वह है ही नहीं। कई गाड़ियां तो आरटीओ में रजिस्टर्ड ही नहीं थीं। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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