श्रीकृष्ण को बेहद प्रिय हैं बांसुरी, मोरपंख और माखन मिश्री, जानते हैं क्यों?

भगवान कृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को दिशा देता है. उनका हर एक कार्य किसी न किसी उद्देश्य के लिए किया गया. इस तरह भगवान श्रीकृष्ण मानव जीवन के हर पहलू से संबंधित हैं. यही वजह है कि सनातन संस्कृति को मामने वाले हर घर में उनकी आराधना की जाती है. श्री द्वारकाधीश से संबंधित प्रतीक चिन्हों का भी विशेष महत्व है. इन्हें घर में रखना भी काफी शुभ माना जाता है. आइए हम जानते हैं श्रीकृष्ण जी के प्रतीक चिन्हों और उनके महत्व के बारे में.

बांसुरी

श्रीकृष्ण जी को बांसुरी अतिप्रिय है, यही वजह है कि उनका एक नाम मुरलीधर भी प्रचलित हुआ. वाद्य के तौर पर बांसुरी के स्वर बेहद सुरीले होते हैं. यह संदेश देती है कि हमारे जीवन को भी बांसुरी की तरह ही सुरीला और मधुर होना चाहिए. चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, हमें हर हाल में खुश रहते हुए दूसरों को भी खुशी देना चाहिए.

माखन मिश्री

कन्हैया को माखन बेहद पसंद था. गोपियों का माखन चुराकर खाने की वजह से उनका नाम माखनचोर भी पड़ा. भगवान बालमुकुंद को माखन मिश्री भी बहुत पसंद हैं. माखन और मिश्री को जब एक साथ मिलाया जाता है तो यह दोनों मिलकर स्निग्ध और मधुर स्वाद देते हैं. हमारा जीवन भी माखन मिश्री की तरह घुल मिलकर मिठास देने वाला होना चाहिए.

मोरपंख

मोरपंख भी कृष्ण जी को बहुत भाता है, यही वजह है कि वे इसे अपने मुकुट पर धारण करते हैं. धार्मिक ग्रंथों में मोरपंख का बड़ा महत्व बताया गया है. यह जीवन में कष्टों को कम कर सुख-शांति और समृद्धि लाता है.

कमल

शास्त्रों में कमल के पुष्प को बेहद पवित्र माना जाता है. कीचड़ में खिलने के बावजूद भी वह अपनी पवित्रता, सुंदरता एवं कोमलता का त्याग नहीं करता है. यह हमें जीवन की किसी भी परस्थिति में सहज एवं सुंदर तरीके से जीने की सीख देता है.

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वैजयंती माला

मुरली मनोहर अपने गले में वैजयंती माला को धारण करते हैं. कमल के बीजों को पिरोकर इस माला को तैयार किया जाता है. कमल के बीज काफी सख्त होते हैं. हमें वैजयंती माला से संदेश मिलता है कि जीवन
भले ही कितनी भी कठनाईयों से घिरा हो लेकिन समझदारी से लिए गए निर्णय सख्त राहों को भी आसान बना देते हैं.

गाय

सनातन संस्कृति में गाय को सबसे पवित्र जीव माना गया है. पंचगव्य यानि गौ दूध, गौ दही, गौ मूत्र, गौ घी एवं गौ गोबर का धर्मशास्त्रों में काफी महत्व बताया गया है. गौसेवा से कष्टों का नाश होकर समृद्धि मिलती है. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतhindi.news18.com
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