गणेशजी के साथ ही महालक्ष्मी की पूजा, शुक्रवार और पूर्णिमा के योग में करनी चाहिए

  • श्रीगणेश को हल्दी से पीले किए चावल पर और देवी लक्ष्मी को कुमकुम से लाल किए चावल पर विराजित करें

शुक्रवार, 5 जून को ज्येष्ठ मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इस दिन मांद्य चंद्र ग्रहण भी रहेगा। इसका धार्मिक महत्व नहीं है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शुक्रवार और पूर्णिमा के योग में गणेशजी और देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए। पूर्णिमा तिथि पर नदी स्नान और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। जानिए इस दिन गणेशजी और महालक्ष्मी की पूजा कैसे कर सकते हैं…

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इन मंत्रों का कर सकते हैं जाप

पूर्णिमा पर गणेश मंत्र- ऊँ महोदराय नम:। ऊँ विनायकाय नम:, श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं। महालक्ष्मी मंत्र ऊँ महालक्ष्म्यै नम:। ऊँ दिव्याये नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं।

ये है गणेश-लक्ष्मी की सरल पूजा विधि

पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उ‌‌ठें। स्नान आदि कार्यों के बाद घर के मंदिर में पूजा की व्यवस्था करें। इसके बाद श्रीगणेश को हल्दी से पीले किए हुए चावल पर विराजित करें। देवी लक्ष्मी को कुमकुम से लाल किए हुए चावल पर विराजित करें। देवी-देवताओं का मुख पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए। पंचामृत से स्नान कराएं। दूध, दही, घी, शहद और मिश्री से पंचामृत बनता है। इसके बाद गणेशजी को चंदन, लाल फूल चढ़ाएं। देवी लक्ष्मी को भी कुमकुम और लाल फूल अर्पित करें। गुड़ के लड्डू और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं।

सुगंधित अगरबत्ती जलाएं। दीपक जलाएं। लक्ष्मी-गणेशजी की आरती करें। पूजा के अंत में भगवान से गलतियों की क्षमा मांगे और मनोकामनाओं को पूरा करने की प्रार्थना करें। इसके बाद पंचामृत व प्रसाद ग्रहण करें।