Mukhtar Ansari: बांदा जेल में एंबुलेंस से उतरकर व्हीलचेयर पर नहीं, पैदल ही बैरक तक गया माफिया

माफिया विधायक मुख्तार अंसारी पंजाब की रूपनगर जेल से भले ही व्हीलचेयर पर एंबुलेंस तक आया था, लेकिन बांदा जेल में वह पैदल ही बैरक तक गया। इससे पहले कानपुर देहात के सट्टी थाने में भी पैदल चलकर शौचालय पहुंचा। उसे बांदा मंडल कारागार में फिलहाल 16 नंबर मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। जेल मुख्यालय के निर्देश पर माफिया छह दिनों तक इसी में रहेगा। यही बैरक उसका स्थायी ठिकाना बन सकती है। उसे 15 नंबर बैरक में भी शिफ्ट किया जा सकता है, क्योंकि वह विशेष तौर पर पहले से ही तैयार है।

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पंजाब के रूपनगर स्थित जेल से माफिया को लेकर पुलिस टीम के काफिले की चार गाडिय़ां बुधवार सुबह 4:30 बजे बांदा जेल परिसर में दाखिल हुईं। उस समय दोनों छोर पर बैरीकेडिंग करने के साथ आवागमन भी रोक दिया गया था। उधर, जेल में सुरक्षा बढ़ाने के साथ आसपास का इलाका सील कर दिया गया। रातोंरात जेल गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के साथ इनकी संख्या बढ़ाकर 32 की जगह 50 कर दी गई है।

बांदा जिले में पपरेंदा के पास से चिल्ला मार्ग, महाराणा प्रताप चौराहा होकर पुलिस लाइन की ओर काफिला घूमा। वहां से सिर्फ पुलिस के वाहन ही जेल गेट तक आए। जेल के अंदर सबसे पहले सीओ सत्यप्रकाश शर्मा, एएसपी महेंद्र प्रताप चौहान की गाड़ी घुसी। उसके बाद मुख्तार को लाने वाली एंबुलेंस व पीछे से एक और गाड़ी समेत चार वाहन ही प्रवेश पा सके। एंबुलेंस के पिछले दरवाजे से उतरा माफिया जेल के छोटे गेट से मुलाहिजा बैरक पहुंचा।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करीब 26 माह बाद माफिया मुख्तार फिर उत्तर प्रदेश लाया गया है। उसे 21 जनवरी 2019 को पंजाब की रूपनगर जेल में शिफ्ट किया गया था। बांदा जेल में पिछली बार मार्च 2017 से दो साल तक उसका ठिकाना बैरक नंबर 15 ही थी।

क्या है मुलाहिजा बैरक

जेल मैनुअल के अनुसार, किसी भी गैंगस्टर के आने पर उसे सबसे पहले मुलाहिजा बैरक में रखा जाता है। उससे कोई मुलाकात नहीं कर सकता है। 24 घंटे बाद या जेल प्रशासन अपनी सुविधानुसार उसे दूसरी बैरक में शिफ्ट करता है। जेल सूत्र बताते हैं, कोरोना संक्रमण के बाद से मुलाहिजा बैरक की व्यवस्था जेलों में नहीं है। बंदी पहले अस्थायी जेल में रखे जाते हैं। वहां 14 से 15 दिन पूरे करने के बाद स्थायी रूप से जेल की बैरक में भेजा जाता है।

टेढ़े-मेढ़े रास्ते से गुजरी टीम

पुलिस टीम बांदा से ङ्क्षबदकी होकर कानपुर के रास्ते पंजाब पहुंची थी। वापसी में इटावा व औरैया के बाद कानपुर देहात में सिकंदरा से रूट बदला। यहां से राजपुर, सट्टी, भोगनीपुर, घाटमपुर, हमीरपुर के रास्ते पुलिस टीम बांदा आई। सिकंदरा से घाटमपुर और भारी वाहनों वाले घाटमपुर-हमीरपुर रोड जैसे टेढ़े-मेढ़े रास्ते से काफिला गुजरा।

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चार बार रुका काफिला, 55 मीटर चला पैदल

माफिया मुख्तार अंसारी को रूपनगर से बांदा ले जा रही पुलिस टीम का काफिला मंगलवार रात रास्ते में चार बार रुका। पहले यमुना एक्सप्रेस-वे पर जेवर टोल प्लाजा और इसके बाद आगरा के डौकी थानाक्षेत्र में काफिला रुका। यहां से आगे बढऩे पर कानपुर देहात के सिंकदरा से राजपुर के बीच 1:15 बजे मवेशी आने व माफिया को लघुशंका को लेकर सट्टी थाने के बाहर 1:30 बजे काफिला रुका। चार में दो जगहों पर माफिया पैदल चला। सट्टी में एंबुलेंस से उतरकर पैदल थाना परिसर में करीब 20 मीटर दूर स्थित शौचालय तक गया। वापस भी पैदल ही आया। वहीं, बांदा जेल में वह करीब 15 मीटर पैदल चला। डाक्टरों के मुताबिक, मुख्तार को खड़े होने और बैठने के वक्त सहारे की जरूरत पड़ती है। बाकी वह चल सकता है। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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