Kartik Purnima 2020: कार्तिक पूर्णिमा पर जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़े विधान

Kartik Purnima 2020: कार्तिक मास की पूर्णिमा 30 नवंबर को है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता हैं। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा का मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

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कार्तिक पूर्णिमा का मुहूर्त 2020

पूर्णिमा तिथि शुरू: 29 नवंबर, रविवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 30 नवंबर, सोमवार को दोपहर 03 बजे तक।
गंगा स्नान – 30 नवंबर

कार्तिक पूर्णिमा क्या करें

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद राधा-कृष्ण का पूजन और दीपदान करना चाहिए। इस दिन गौ, घी और दीप दान करने से आर्थिक संपत्ति बढ़ती है। कार्तिक पूर्णिमा का व्रत रखने वालों को इस दिन हवन जरूर करना चाहिए और किसी जरुरतमंदों को भोजन कराना चाहिए।

ब्रह्मा जी का हुआ था अवतरण

इसी दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्म सरोवर पुष्कर में अवतरण हुआ था। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री ब्रह्मा की नगरी पुष्कर आते हैं, पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान करने के पश्चात ब्रह्मा जी के मंदिर में पूजा-अर्चना कर दीपदान करते हैं और देवों की कृपा पाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है।

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त्रिपुरासुर का हुआ था वध

इस संदर्भ में एक कथा है कि त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक भयभीत थे। त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया था। त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था। उसके तप से तीनों लोक जलने लगे, तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिए। त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव ,जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं। इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा। सभी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से इस दैत्य के अंत का उपाय पूछा। ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया। देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की। तब महादेव ने त्रिपुरासुर का वध किया। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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