गुजरात के प्राचीन हनुमान मंदिर में बना कोरोना वार्ड…

मंदिर की धर्मशाला बनी कोरोना वार्ड

देश में कोरोना का प्रकोप अब भी जारी है और रोजाना नए मामले सामने आए रहे हैं। इसी बीच गुजरात स्थित कष्टभंजन हनुमानजी के मंदिर की धर्मशाला कोरोना वार्ड में तब्‍दील कर दिया गया है। यह मंदिर बोटाद जिले के सारंगपुर में स्थित है। हनुमानजी के मंदिर को उनके नाम के अनुरूप कष्‍टभंजन यानी कष्‍टों को दूर करने वाले अस्‍पताल में बदल दिया गया है। मंदिर के व्‍यवस्‍थापकों ने संकट की इस घड़ी में खुद से आगे बढ़कर मंदिर की धर्मशाला 100 बेड के एक अस्‍पताल में बदल दिया है।

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इन सुविधाओं से लैस कोरोना वार्ड

मंदिर प्रशासन ने यहां के अतिथि गृह को 100 बेड और 50 कमरों वाले वार्ड में बदल दिया है। यहां 10 आईसीयू बेड, ओपीडी, डॉक्‍टर्स रूम, स्‍टाफ रूम, ऑक्‍सीजन सप्‍लाई, 5 वेंटिलेटर्स और 45 आइसोलेशन वार्ड की सुविधा दी गई है। इतना ही नहीं नाम के अनुरूप कष्‍टभंजन हनुमान जी यह मंदिर संकट की इस वक्‍त काफी दिनों से जरूरतमंदों को खाने-पीने की चीजें मुहैया करवाने का काम कर रहा है। आइए जानते हैं मंदिर का इतिहास और मान्‍यताएं…

यहां शनिदेव हैं स्‍त्री के रूप में मंदिर के बारे में एक बड़ी अनोखी मान्‍यता प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जब शनिदेव का प्रकोप बहुत बढ़ गया था तो दुखी लोगों ने हनुमानजी से गुहार लगाई। भक्‍तों की प्रार्थना को सुनकर हनुमानजी को शनिदेव पर बहुत क्रोध आया और उन्‍होंने दंड देने का फैसला। जब शनिदेव को यह बात पता चली है तो वह हनुमानजी के प्रकोप से खुद को बचाने के बारे में सोचने लगे।

शनिदेव ने लगाई यह जुगत

शनिदेव के दिमाग में एक विचार आया। शनिदेव को यह बात पता थी कि हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और वह स्त्रियों से दूर रहते हैं और न ही उन पर हाथ उठाते हैं। हनुमानजी के क्रोध से बचने के लिए उन्‍होंने स्‍त्री कर रूप धारण कर लिया और हनुमानजी के चरणों में गिर पड़े। यह सब देखकर हनुमानजी ने उन्‍हें क्षमा कर दिया।

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आज भी स्थित है मूर्ति यहां आज भी हनुमानजी की मूर्ति के के चरणों में शनिदेव स्‍त्री रूप में विराजमान हैं। इसी रूप में उनकी पूजा होती है। हनुमानजी के साथ-साथ शनिदेव के इस रूप के दर्शन करने भक्‍त दूर-दूर से आते हैं। साथ ही यह भी मान्‍यता है यहां तो भी भक्‍त अपने कष्‍ट लेकर हनुमानजी के दरबार में अर्जी लगाता है, बजरंगबली उनके सभी कष्‍ट दूर कर देते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर को कष्‍टभंजन हनुमानजी के मंदिर के नाम से जाना जाता है।

शनिदोष से पीड़ित आते हैं यहां अगर किसी की कुंडली में शनिदोष है तो ऐसे भक्‍त यहां दर्शन के लिए आते हैं। कष्‍टभंजन हनुमानजी उनके सभी कष्‍ट दूर करके उन्‍हें शनि के प्रकोप से भी बचाते हैं और भक्‍तों के शनिदोष दूर होते हैं। यहां साल भर भक्‍तों की लंबी कतार रहती है।