जानें किस देवता की कौन सी है सवारी और उसके पीछे क्या छुपा है संदेश

मूषक है गणपति की सवारी
गणपति का वाहन मूषक अर्थात चूहा है। चूहे का स्वभाव है कि वह प्रत्येक वस्तु, चाहे वह काम की हो या बेकार सबको कुतरकर क्षति पहुंचाता है। इसी प्रकार कुतर्की लोग भी हर कार्य में अपने कुतर्कों द्वारा व्यवधान उत्पन्न करते हैं। श्री गणेश ज्ञान एवं बुद्धि के देवता हैं तथा कुतर्क चूहा है, जिसे गणेश जी ने अपनी सवारी बनाकर अपने नीचे दबा रखा है। इस बात से यह सन्देश मिलता है कि हमें बुरे लोगों की अर्थहीन बातों को हटाकर उनका दमन कर अपने विवेक से काम लेना चाहिए।

बैल भगवान शिव का वाहन
शिव पुराण में शिवजी का वाहन वृषराज नंदी को बताया गया है। आम तौर पर खामोश रहने वाले बैल का चरित्र उत्तम और समर्पण भाव वाला होता है।बल और शक्ति के प्रतीक बैल को मोह-माया और भौतिक इच्छाओं से परे रहने वाला प्राणी माना जाता है। यह सीधा-साधा प्राणी जब क्रोधित होता है तो शेर से भी भिड़ जाता है। शिव की सवारी बैल से जन-जन को यही प्रेरणा मिलती है कि शक्तिशाली होने पर भी शांत एवं सहज रहना चाहिए व परिश्रम द्वारा जीवन में सदैव धर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए।

मां दुर्गा करती हैं शेर की सवारी
देवी भागवत के अनुसार माँ दुर्गा की सवारी सिंह वन में संयुक्त परिवार में रहने वाला प्राणी है। यह वन का सबसे शक्तिशाली प्राणी होता है, किंतु अपनी शक्ति को व्यर्थ में खर्च नहीं करता है। आवश्यकता पड़ने पर ही इसका उपयोग करता है। देवी का वाहन शेर यह संदेश देता है कि घर के मुखिया को अपने परिवार को जोड़कर रखना चाहिए तथा व्यर्थ के कार्यों में अपनी शक्ति को न लगाकर घर को सुखी बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए।

उल्लू है श्री लक्ष्मी जी का वाहन
उल्लू क्रियाशील प्रवृत्ति का पक्षी है। वह अपना पेट भरने के लिए भोजन की तलाश में निरंतर कार्य करता रहता है। इस कार्य को वह पूरी लगन के साथ  करता है। लक्ष्मी के वाहन उल्लू से यही सीखने को मिलता है कि जो व्यक्ति दिन-रात मेहनत करता है, माँ लक्ष्मी की सदैव उन पर कृपा होती है। मां लक्ष्मी हमेशा स्थायी रूप से मेहनती लोगों के घर में निवास करती हैं।

गरुड़ पर सवार हैं भगवान विष्णु
गरुड़ ऐसा पक्षी है, जो आकाश में बहुत ऊंचाई पर उड़कर भी पृथ्वी के छोटे-छोटे जीवों पर नज़र रख सकता है। गरुड़ सांपों का शत्रु होता है। इस कारण कहा जाता है कि यह विष को ख़त्म करने वाला अर्थात् आतंक को नष्ट करने वाला पक्षी है। ऐसे ही परम शक्तिशाली भगवान विष्णु सबका पालन करने वाले हैं। उनकी नज़र प्रत्येक जीव पर होती है। विष्णु जी के वाहन से  सदैव अपनी दृष्टि पैनी बनाए रखने एवं जागरूक बने रहने की प्रेरणा मिलती है।

हंस है मां सरस्वती का वाहन
हंस पवित्र, जिज्ञासु और समझदार पक्षी होने के साथ-साथ जीवनपर्यंत एक ही हंसनी के साथ रहता है। परिवार में प्रेम और एकता का यह उत्तम उदहारण है। इसके अलावा हंस के सामने दूध और पानी मिलाकर रख दें, तो वह केवल दूध पी लेता है और पानी छोड़ देता है। कहने का तात्पर्य यह कि हंस सिर्फ गुण ग्रहण करता है, अवगुण छोड़ देता है। हंस मोती चुगकर सर्वश्रेष्ठ को ग्रहण करने का संदेश देता है।

पिशाच पर हैहनुमान जी का आसन
हनुमानजी प्रेत या पिशाच को अपना आसन बनाकर उनपर बैठते हैं और इन्ही को अपने वाहन के रूप में प्रयोग करते हैं। पिशाच या प्रेत बुराई तथा दूसरों को भय एवं कष्ट देने वाले होते हैं। इसका अर्थ है कि हमें बुराई व दुष्ट प्रवृति के लोगों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।

रथ पर सवार भगवान सूर्य 
हमारी सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं, जिन्हे शक्ति एवं स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है। भगवान सूर्य का रथ यह प्रेरणा  देता है कि हमें अच्छे कार्य करते हुए सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए, तभी जीवन में सफलता मिलती है।

मगर पर माँ गंगा करती हैं सवारी
शास्त्रों में गंगा माता का वाहन मगरमच्छ होने का उल्लेख मिलता है। मां गंगा के वाहन से हमें यही संदेश मिलता है कि जलीय जीव-जंतुओं को मारना नहीं चाहिए, क्योंकि जल में रहने वाले हर प्राणी की पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनको मारना यानि प्रकृति से छेड़छाड़ करना है, जिसके परिणाम बहुत भयानक होते हैं।