माता के इस मंदिर का ऐसा है चमत्कार, नासा के वैज्ञानिक भी करते हैं नमस्कार

कोई जान ना पाया मंदिर का रहस्य नवरात्र का समय चल रहा है, भारत में देवी मां के कई मंदिर है जो धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्व रखते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिस मंदिर के चमत्कार देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। वैज्ञानिक इस मंदिर के चुंबकीय रूप से चार्ज होने के कारणों और प्रभावों पर शोध कर रहे हैं। मान्यता है कि आज तक इस मंदिर के रहस्य का पता नहीं लग पाया है। आइए जानते हैं कहां है यह रहस्यमयी मंदिर और क्या है इसकी विशेषता?

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चुंबकीय शक्ति का केंद्र है कसार देवी मंदिर भारत की देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध राज्य उत्तराखंड की अल्मोड़ा पहाड़ियों पर कसार देवी मंदिर स्थित है। मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहां पर देवी मां साक्षात अवतरित हुई थी। कहा यह भी जाता है कि भारत में यह एकलौती ऐसी जगह है जहां चुंबकीय शक्ति पाई जाती है। दरअसल मंदिर के आसपास की जगह ऐसी है जहां धरती के अंदर विशाल भू-चुंबकीय पिंड पाए जाते हैं। जानकारों के मुताबिक कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं।

मंदिर का अनसुलझा रहस्य इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां वाकई कई शक्तियां मौजूद हैं। जिस कारण नासा के वैज्ञानिक भी यहां के बारे में कई तरह की शोध कर चुके है लेकिन आज भी कोई वैज्ञानिक इस मंदिर के रहस्य को सुलझा नहीं पाया है। वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, अल्मोड़ा के इस मंदिर और दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग में एकदम अनोखी और अद्भुत चमत्कारिक समानताएं पाई गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कारण ही इस जगह को अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र माना जाता है, जहां मानसिक शांति का अनुभव किया जा सकता है। कसार देवी मंदिर परिसर में जी पी एस 8 केंद्र चिह्नित किया गया है, इस संबंध में अमेरिका की संस्था नासा ने ग्रेविटी पॉइंट( चुंबकीय केंद्र) के बारे में बताया है। मुख्य मंदिर के द्वार के बाईं ओर नासा के द्वारा यह स्थान चिह्नित करने के बाद ही GPS 8 लिखा गया है।

सैकड़ों सीढ़ियां चढ़कर आते हैं भक्त 1960 और 1970 के दशक में हिप्पी आंदोलन के दौरान यह एक लोकप्रिय स्थान था, जो गांव के बाहर, क्रैंक रिज के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर जिस जगह पर है वह स्थान घरेलू और विदेशी दोनों ही ट्रैकर्स और पर्यटकों को वर्षों से आकर्षित करता रहा है। आम दिनों के साथ नवरात्र में यहां श्रद्धालु भारी संख्या में कसार देवी माता के दर्शन करने आते हैं। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर में) को यहां कसार देवी का मेला लगता है। भक्तों में इस जगह को लेकर इतनी गहरी आस्था है कि यहां आने वाले भक्त बिना किसी थकान महसूस किए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़कर माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।