जानकी जयंती से लेकर ईद उल फितर तक, आइए जानते हैं मई के महीने के प्रमुख व्रत और त्‍योहार

मई में पड़ने वाले प्रमुख त्‍योहार की सूची

मई के महीने की शुरुआत इस बार बैसाख मास के शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी से हो रही है और महीने के पहले दिन ही सीता नवमी पड़ रही है। उसके बाद मोहिनी एकादशी, नृसिंह जयंती, वटसावित्री व्रत के साथ ही महीने के आखिर में मुस्लिमों का सबसे महत्‍वपूर्ण त्‍योहार ईद उल फितर पड़ रहा है। इन सभी त्‍योहारों का हिंदू धर्म में विशेष महत्‍व बताया गया है। इसके अलावा मई में पड़ने वाले अन्‍य त्‍योहारों के बारे में भी आप जान लीजिए…

जानकी जयंती 1 मई

शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन सीता का प्राकट्य हुआ था। इस पर्व को सीता नवमी भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र में महाराज जनक को भूमि से एक बालिका की प्राप्ति हुई थी। जोती हुई भूमि को और हल की नोंक को भी सीता कहा जाता है, इसलिए बालिका का नाम जनक ने सीता रखा। इस दिन व्रत करने का विशेष महत्त्व है। मान्यता है कि इस व्रत के रखने से मां सीता जैसी पवित्रता और पतिव्रता होने की प्रेरणा मिलती है।

यह भी पढ़े: Health Tips By WHO : WHO ने कहा, आयरन की कमी दूर करने के लिए ये 5 Foods हैं…

मोहिनी एकादशी 4 मई

बैसाख शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि अर्थात एकादशी के दिन मोहिनी एकादशी का व्रत रखने का विधान है। ऐसा विश्वास है कि इस व्रत को रखने से व्रती के सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। एक बार गुरु वशिष्ठ के कहने पर भगवान राम ने भी यह व्रत रखा था और द्वापर युग में भगवान कृष्ण के कहने पर राजा युधिष्ठिर ने भी मोहिनी एकादशी का व्रत रखा था।

नृसिंह जयंती 6 मई

नृसिंह जयंती बैसाख महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस जयंती का बहुत महत्व है। इस साल नृसिंह जयंती 6 मई बुधवार को है। भगवान विष्णु ने इसी दिन अपने भक्त प्रहलाद को राक्षसराज हिरण्यकश्यप से बचाने के लिए आधे नर और आधे सिंह के रूप में नृसिंह अवतार लिया था। मान्यता है कि नृसिंह जयंती के दिन व्रत रखने से भक्त के सारे दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही नृसिंह मंत्र का जाप भी किया जाता है।

यह भी पढ़े: Palm Reading : जीवन रेखा का ऐसा होना ठीक नहीं, देखिए आपकी रेखा क्या कहती है

बैशाख बुद्ध पूर्णिमा 7 मई

सनातन धर्म में वैशाख मास की पूर्णिमा को बुध पूर्णिमा के रूप में मनाए जाने की परंपरा है। इस साल यह पूर्णिमा 7 मई को पड़ रही है। इस पूर्णिमा को बेहद शुभ और महत्‍वपूर्ण माना जाता है। महात्‍मा बुद्ध के रूप में इस दिन भगवान विष्‍णु के 9वें अवतार हुए थे। इस वजह से बुद्ध पूर्णिमा का पौराणिक महत्‍व भी माना जाता है।

अपरा एकादशी 18 मई

ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं। इस साल यह शुभ तिथि 18 मई दिन शनिवार को है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। इस दिन ध्यानपूर्वक पूजापाठ और धर्म-कर्म के काम किए जाएं तो साल भर भगवान विष्णु का प्रेम और मार्गदर्शन मिलता है। इस दिन व्रत करने से प्राप्त होनेवाले पुण्य का महत्व स्वत: ही कई गुना बढ़ जाता है।

वटसावित्री शनि जयंती 22 मई

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का काफी महत्व है। यह पूजन स्त्रियां सौभाग्य प्राप्ति और पति की लंबी आयु की कामना के लिए करती हैं। इस दिन सभी सुहागन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। हर साल वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है। इस साल यह त्‍योहार 22 मई बुधवार को है।

ईद उल फितर 25 मई

इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक, साल में सबसे पहले जो ईद आती है, उसे ईद-उल-फितर कहा जाता है। इसे मीठी ईद या फिर सेवइयों वाली ईद भी कहा जाता है। रमजान माह की समाप्ति के बाद रोज़ा खत्म होने के त्योहार के रूप में ईद मुस्लिम समुदाय धूमधाम से मनाता है। पहली ईद उल-फितर पैगंबर मुहम्मद ने सन् 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी।