अमरनाथ गुफा में प्रकट हुए हिमलिंग महादेव, आइये जानते है इस गुफा का रहस्य

बाबा बर्फानी की पहली तस्‍वीर सामने आई अमरनाथ की गुफा में बाबा बर्फानी की शिवलिंग अपना पूर्ण आकार ले चुकी है। आज बाबा बर्फानी की पहली तस्‍वीर सामने आई। कश्‍मीर के दक्षिणी भाग में स्थित पवित्र गुफा से ऐसे वक्‍त में हिमलिंग की तस्‍वीरें सामने आई हैं जब कोरोना त्रासदी के बीच कुछ अमरनाथ यात्रा के शुरू होने पर संदेह है। बाबी बर्फानी के दर्शन करने हर साल पहला जत्‍था जून के लगभग आखिरी सप्‍ताह में रवाना हो जाता था। लेकिन इस बार अभी तक स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है कि यात्रा कब शुरू हो पाएगी? इस बीच चलिए आपको बताते हैं गुफा से जुड़े ये रहस्‍य…

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माता पार्वती को सुनाया था अमरता का मंत्र

मान्‍यता है कि यही वह गुफा है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अपने अमर होने के रहस्‍य के बारे में बताया था। इसी स्‍थान पर ही शिवजी ने पार्वती को बताया था कि क्‍यों ब्रह्मा, विष्‍णु और स्‍वयं वह खुद सृष्टि का अंत हो जाने पर भी अमर बने रहते हैं। यानी मरते नहीं हैं।

माता पार्वती ने पूछा था यह प्रश्‍न

नीलमत पुराण, शिव पुराण में एक कथा का उल्लेख मिलता है कि एक समय देवी पार्वती ने भगवान शिव से उनके गले में मुंड माला देखकर पूछा, हे प्रभु यह मुण्ड किसके हैं और आप इन्हें धारण क्यों करते हैं? भगवान शिव ने कहा कि जितनी बार तुम जन्म लेती हो और मृत्यु को प्राप्त होती हो, उतनी बार इस मुण्ड माला में एक मुण्ड बढ़ जाता है। यह सभी मुण्ड तुम्हारे ही हैं। देवी पार्वती को यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने भगवान शिव से कहा कि आप अमर हैं तो मैं अमर क्यों नहीं हूं!

सदैव रहता है कबूतर का जोड़ा

ऐसी मान्‍यता है कि जब शिवजी माता पार्वती को अमरता का ज्ञान दे रहे थे, उस समय उस गुफा में उन दोनों के अलावा कबूतर का एक जोड़ा भी था। शिवजी के मुख से कथा सुनने के बाद यह कबूतर को जोड़ा भी अमर हो गया। इसलिए आज भी अमरनाथ गुफा में एक कबूतर का जोड़ा सदैव रहता है। इस जोड़े के बारे में ऐसा कहा जाता है कि अमरनाथ की गुफा में जिस व्‍यक्ति को भी इस कबूतर के जोड़े के दर्शन हो जाते हैं, वह व्‍यक्ति मोक्ष प्राप्‍त कर लेता है।

शिवलिंग के लिए कहां से आता है पानी ?

इस गुफा के बारे में सबसे ज्‍यादा हैरान करने वाली बात यह है कि यहां हिमलिंग बनने के लिए पानी का स्रोत क्‍या है, इस बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया है। यह पहेली अभी तक अनसुलझी है।

कच्‍ची और मुलायम बर्फ

आज तक कोई भी इस रहस्‍य के बारे में नहीं जान पाया है कि अमरनाथ की गुफा में जो बर्फ से जो शिवलिंग निर्मित होती है उसकी बर्फ ठोस होती है और जबकि उसके आस-पास की या फिर बाहर की बर्फ कच्‍ची होती है और मुलायम होती है। ऐसा आखिर क्‍यों होता है, यह बात सभी के लिए ए‍क रहस्‍य बना हुआ है।

सारी थकान हो जाती है अचानक से दूर

यहां पर पैदल चलकर आए श्रृद्धालु बेहद थके हुए रहते हैं। मगर जैसे ही वह गुफा में प्रवेश करते हैं उनकी सारी थकान दूर हो जाती है। अचानक से कुछ ऐसा होता है कि उनकी थकान दूर हो जाता है। इसकी वजह क्‍या है आज तक कोई भी इस बारे में नहीं जान पाया है।

शिव ने अपने सरीसृपों को यहां छोड़ा

माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताने से पहले भगवान शिव ने अपने गले के शेषनाग को शेषनाग झील, पिस्सुओं को पिस्सु टॉप, अनंतनागों को अनंतनाग में छोड़ दिया, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा। इस प्रकार सभी जीवों को खुद से दूर कर उन्होंने माता पार्वती को उस गुफा में अमर होने का रहस्य बताया।

मुस्लिम ने की थी अमरनाथ गुफा की खोज

बूटा मलिक नामक एक मुस्लिम गडरिया एक दिन भेड़ चराते-चराते बहुत दूर निकल गया। बूटा स्वभाव से बहुत विनम्र और दयालु था। ऊपर पहाड़ पर उसकी भेंट एक साधु से हुई। साधु ने बूटा को एक कोयले से भरी एक कांगड़ी ( हाथ सेकनेवाला पात्र ) दिया। बूटा ने जब घर आकर उस कांगड़ी को देखा तो उसमें कोयले की जगह सोना भरा हुआ था। तब वह उस साधु को धन्यवाद करने पहुंचा। लेकिन वहां साधु नहीं मिले और एक गुफा दिखी।

साधु की जगह दिखाई दी गुफा

जब बूटा मलिक ने उस गुफा के अंदर जाकर देखा तो बर्फ से बना सफेद शिवलिंग चमक रहा था। उसने यह बात गांवालों को बताई और इस घटना के 3 साल बाद अमरनाथ की पहली यात्रा शुरू हुई। तभी से इस यात्रा का क्रम चल रहा है। बूटा मलिक के वंशज आप भी इस गुफा और शिवलिंग की देखरेख करते हैं।

कबूतर के पीछे पौराणिक कथा

जब भगवान शिव ने माता पार्वती को कथा सुनाने के लिए अमरनाथ की गुफा में प्रवेश किया तो कालाग्नि को यह आदेश दिया कि गुफा में जो भी जीव हैं उन्‍हें भस्‍म कर दो। कालाग्नि ने ऐसा ही किया और सभी जीवों को भस्‍म कर दिया। लेकिन उस गुफा में कबूतर को दो अंडे रह गए। चूंकि अंडों को जीवधारी नहीं माना जाता है, इसलिए वे भस्‍म होने से बच गए। जब भगवान शिव ने माता पार्वती को कथा सुनाना आरंभ किया तो इन अंडों से कबूतर निकल आए और वे भी कथा सुनने लगे। इस प्रकार इन कबूतरों को साक्षात भगवान शिव और देवी पार्वती के दर्शन के समान माना गया है।