खरमास समाप्त बैसाख शुरू : इन 6 सस्ती चीजों का दान करके पा सकते हैं भोग मोक्ष और स्वास्थ्य

सूर्य और मंगल के मिलन से बढ़ेगी गर्मी

गर्मियों का मौसम आ चुका है और 13 अप्रैल से संक्रांति की गणना के हिसाब से बैसाख का महीना भी आरंभ हो चुका है क्योंकि सूर्य मेष राशि में संचार करेंगे। शास्‍त्रों में इस महीने का खास महत्‍व माना जाता है। इस महीने में किया गया दान कई गुना वापस होकर लौटता है। बैसाख को सौर वर्ष का भी पहला महीना माना जाता है। मेष राशि में सूर्य के आने से खरमास भी समाप्त हो गया है। मेष राशि को ज्योतिषशास्त्र में अग्नि तत्व की राशि कहा गया है जिसके स्वामी मंगल हैं। अग्नि तत्व की राशि में अग्नि के कारक ग्रह सूर्य के संचार से अब तेजी से गर्मी बढ़ेगी और जीव जंतु ताप से पीड़ित होंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि बैसाख संक्रांति और पूरे बैसाख के महीने में किया गया दान न सिर्फ इस लोक में आपको पुण्‍य देता है बल्कि मृत्‍यु के बाद भी भोग मोक्ष प्रदान करता है। इस महीने कुछ खास चीजों का दान विशेष फलदायी माना गया है।

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इन वस्‍तुओं का करें दान

बैसाख के महीने में गर्मी बढ़ जाती है, इसलिए ठंडी वस्‍तुओं को दान करना जरूरी बताया गया है। इनमें आप जल से भरा घड़ा, पंखा, तरबूज, खरबूज और कच्‍चे आम दान कर सकते हैं। इसके अलावा मौसमी फल,शक्‍कर और गुड़ का दान भी शुभ होता है। बैसाख के महीने में सत्तू का दान भी उत्तम माना गया है। साथ ही इस महीने सत्तू स्‍वयं भी खाना चाहिए। इस वक्‍त लॉकडाउन चल रहा है और कई लोग ऐसे हैं जो गांव से शहर में आकर मजदूरी करते हैं। ऐसे में इन वस्तुओं का दान इन्हें देकर आप पुण्य के भागी हो सकते हैं।

जौ भी किया जाता है दान

बैसाख के महीने में साबुत जौ या फिर जौ का आटा भी दान किया जाता है। शास्‍त्रों में जौ को स्‍वर्ण के समान बताया गया है। जौ के दान को स्वर्ण के दान के बराबर फलदायी माना गया है। जौ का प्रयोग यज्ञ में भी अनिवार्य रूप से किया जाता है, इसलिए ब्राह्मणों को दान में जौ जरूर देना चाहिए।

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जूते-चप्‍पल भी कर सकते हैं दान

आप चाहें तो बैसाख के महीने में जूते और चप्‍पल का भी दान कर सकते हैं। किसी जरूरतमंद को इस वक्‍त आप जूते या चप्‍पल दे सकते हैं। ध्‍यान रखें क‍ि दान में दी गई सभी वस्‍तुएं नई होनी चाहिए। यानी कि पहने हुए जूते-चप्‍पल किसी को नहीं देने चाहिए। इस महीने में धरती तप जाती है इसलिए जूतों के दान का विधान बना हुआ है। इन चीजों के दान से परलोक में पिता और पितरों की आत्मा को शांति और शीतलता मिलती है।

बैसाख में सत्तू दान और खाने का यह महत्व

बैसाख के पहले दिन को देश के कई भागों में सतुआनी का त्योहार मनाया जाता है जिसमें लोग सत्तू खाते हैं। इस दिन सत्तू का दान भी किया जाता है। इतना ही नहीं पूरे बैसाख में आप कभी भी सत्तू का दान कर सकते हैं और इसे भोजन के रूप में ग्रहण कर सकते हैं। दरअसल यह धर्म के साथ ही विज्ञान से जुड़ा हुआ मामला भी है। इस महीने में ताप अधिक बढ जाता है। सत्तू पेट से लिए अमृत के समान होता है। इससे स्वास्थ्य अनुकूल रहता है। इसलिए इस महीने में गुड़ या नमक, नींबू के साथ सत्तू खाने की परंपरा ग्रामीण क्षेत्रों में रही है। दूसरी वजह यह भी है कि इस समय रबी की फसलें कटकर घर आ जती हैं। चना, जौ, गेहूं रबी की फसल है। इसलिए भी नव अन्न के रूप में इनका दान और सेवन किया जाता है।

इन नियमों का करें पालन

शास्‍त्रों में मनुष्‍य के लिए बैसाख मास को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। बैसाख मास में आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और बिना प्‍याज लहसुन काे साधारण भोजना करना चाहिए। इन दिनों आपको मदिरा से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए। नीम का सेवन उत्तम माना गया है।

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ये काम न करें

बैसाख के महीने में आपको शरीर में तेल मालिश नहीं करनी चाहिए और रखा हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए। आपको दिन में नहीं सोना चाहिए। कांस के बर्तन में इन दिनों भोजन नहीं करना चाहिए और सके तो रात के व्‍क्‍त भोजन न करें और पलंग पर नहीं सोना चाहिए।