मासिक धर्म में भूल कर भी न करें पूजा पाठ और दान, रखना होगा कुछ बातों का ध्यान…

प्रकृति ने स्त्री को ऐसा बनाया है कि उसे हर महीने मासिक धर्म के चक्र से गुजरना होता है। इसको लेकर धार्मिक और सामाजिक जीवन में कई तरह की भ्रांतियां हैं। जबकि इसी चक्र के कारण स्त्री पुरुषों से अधिक शुद्ध, शक्तिशाली और प्रभावशाली बनती हैं। इसके बारे में देवी पार्वती ने शिव पुराण में कहा है कि अगर मासिक धर्म के कुछ नियमों का पालन किया जाए तो स्त्री अपने सुहाग की आयु बढ़ा सकती है साथ ही अपने वैवाहिक जीवन को अधिक आनंदित, सुखी और संपन्न बना सकती हैं।

मासिक धर्म समाप्त होने पर क्या करें मासिक धर्म समाप्त होने के बाद स्त्री को शुद्धता पूर्वक स्नान करना चाहिए और संपूर्ण ऋंगार करके देवी लक्ष्मी, पार्वती की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद पति को देखना चाहिए। अगर पति मौजूद न हों तो सूर्य देव के दर्शन करने चाहिए। इससे पति की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में आनंद बढ़ता है।

मासिक धर्म के दौरान रखें ध्यान

मासिक धर्म के दौरान रखें ध्यान पुराणों में कहा गया है कि मासिक धर्म के समय स्त्री को घरेलू कार्यों को नहीं करना चाहिए। इस समय स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आराम करना चाहिए। अगर ऐसा कर पाना संभव न हो तो स्नान करके ही भोजन तैयार करना चाहिए। यह परिवार के सदस्यों और स्वयं उनकी सेहत के लिए भी लाभकारी होता है।

देव-पितृ कार्यों से मुक्त

देव-पितृ कार्यों से मुक्त मासिक धर्म के समय स्त्री को भगवान की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस समय किसी को दान दक्षिणा भी नहीं देना चाहिए ऐसा शिव पुराण में बताया गया है। दरअसल इस समय शरीर की शुद्धि की प्रकिया चल रही होती है। जिससे शास्त्रों में स्त्री को इस समय सभी सांसारिक कार्यों और देव-पितृ कार्यों से मुक्त किया गया है। इस समय मानसिक जप करना मन और शरीर दोनों के लिए लाभप्रद माना गया है।

सुहाग की उम्र लंबी

सुहाग की उम्र लंबी मासिक धर्म के समय को छोड़कर हर दिन सुहागन स्त्री को काजल लगाना चाहिए और केशों को संवारना चाहिए। सुहाग के प्रतीक चिह्न जो भी ऋंगार हैं उन्हें भी धारण करना चाहिए। मां पार्वती को सिंदूर लगाकर फिर अपनी मांग भरना चाहिए। इससे सुहाग की उम्र लंबी होती है और परिवार में खुशहाली एवं प्रेम बढ़ता है।

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ऋंगार विहीन ना रहें पति के घर पर रहते हुए पत्नी को कभी भी ऋंगार विहीन नहीं रहना चाहिए। बिखरे बाल, मलीन वस्त्र, उदास चेहरा और दुख का भाव पारिवारिक जीवन के आनंद को कम करता है साथ ही यह सौभाग्य के लिए अच्छा शगुन नहीं माना जाता है।