रमजान 2020: कोरोना वायरस के लक्षण दिखने से रोजा रखना चाहिए या नहीं…?

शुक्रवार की शाम चांद दिखते ही रमजान-उल-मुबारक माह शुरू हो गया। लेकिन कोरोना महामारी के चलते चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। कोरोना संकट के चलते मुस्लिम धर्म गुरुओं ने शहर के मुसलमानों से अपील की थी कि वे अपने-अपने घरों में नमाज पढ़े, रोजा इफ्तार करें और कुरान की तिलावत करें। वैसे तो हर मुस्लिम को रोजे रखने के नियमों के बारे में जानकारी होती है। फिर कुछ ऐसे सवाल होते हैं जो रोजेदारों के दैनिक जीवन में पेश आ सकते हैं। ऐसे ही कुछ सवालात और उनके जवाब आइए जानते हैं हम और आप…

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लॉकडाउन में घर से हो सकती है नमाज जमाअत

प्रश्न: क्या लॉकडाउन की वजह से घर में नमाज जमाअत से हो सकती है?
उत्तर: घर में नमाज जमाअत हो सकती है।

प्रश्न: डायबीटीज के मरीज को रोजे का क्या हुक्म है?
उत्तर: रोजा रखने से नुकसान न हो तो रख सकते हैं।

करवाई जा सकती है जांच

प्रश्न: शुगर चेक करवाएं तो क्या रोजा टूट जाएगा?
उत्तर: रोजे के दौरान खून की जांच करवाई जा सकती है।

प्रश्न: रोजो के अनिवार्य होने का हुक्म कुरआन-ए-पाक में किस जगह लिखा है?
उत्तर: अल्लाह ने कुरआन के दूसरे सूरह में रोजों के अनिवार्य होने का हुक्म दिया है।

हो सकता है रोजा मकरूह

प्रश्न: मुसाफिर का रोजा कस्र है, अगर कोई रोजाना कारोबार या नौकरी के लिए सफर करता है, तो क्या हुक्म है?
उत्तर: ऐसे व्यक्ति को रोजा रखना है।

प्रश्न: रोजे की नीयत करने के बाद टूथपेस्ट या मंजन कर सकते हैं?
उत्तर: इससे रोजा मकरूह हो जाएगा। मिस्वाक कर सकते हैं।

लगा सकते हैं इत्र

प्रश्न: बिना सहरी के रोजा रखना कैसा है?
उत्तर: सहरी करना सुन्नत है। ऐसा न करने पर रोजा हो जाएगा, पर सुन्नत रह जाएगी।

प्रश्न: रोजे की हालत में इत्र या सुरमा लगा सकते हैं?
उत्तर: रोजे की हालत में इत्र लगा सकते हैं, पर सुरमा नहीं।

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कोरोना को लेकर यह है हुक्म

प्रश्न: तरावीह की नियत हर दो रकात में की जाएगी?
उत्तर: एक बार भी कर लेना काफी होगा।

प्रश्न: कोरोना के लक्षण लगें तो रोजे में क्या हुक्म है?
उत्तर: उस व्यक्ति को रोजा नहीं रखना चाहिए। बाद में रोजे की कजा करें।

यह है रहनुमाई फरमाई

प्रश्न: कोरोना वायरस या अन्य बीमारियों से बचने के लिए शरीअत ने क्या रहनुमाई फरमाई है?
उत्तर: पैगंबर मोहम्मद साहब की हिदायत है कि अगर तुम बीमार हो तो इलाज कराओ। कलौंजी में हर बीमारी की दवा मौजूद है, सिवाए मौत के। इफ्तारी व सेहरी में कलौंजी का इस्तेमाल करें।

प्रश्न: मुझे कुरआन-ए-पाक की सिर्फ दस सूरतें याद हैं। क्या तरावीह पढ़ सकते है?
उत्तर: ऐसे में पहली दस रकातों में इन सूरतों को पढ़ें और अगली दस रकातों में उन्हीं सूरतों को दोहरा लें।

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लगाया जा सकता है थर्मामीटर

प्रश्न: रोजे की हालत में बुखार जांचने के लिए मुंह में थर्मामीटर लगाया जा सकता है?
उत्तर: जी हां। असल में इससे कोई चीज़ हलक में नहीं जाती।

प्रश्न: क्या कुरआन की आयातों और तस्बीह वगैरा बिना वुजू पढ़ सकते हैं?
उत्तर: तस्बीह वगैरा बिना वुजू पढ़ सकते हैं। पर, कुरआन बिना वुजू छूना जायज नहीं।