अब सारे तीर्थों के दर्शन का मिलेगा फल, 1 जुलाई से चतुर्मास शुरू…

क्‍यों इसकी यात्रा है इतनी पुण्‍यफलदायी

1 जुलाई, दिन बुधवार को देवशयनी एकादशी से ही शुरू हो जाएगा चतुर्मास। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, अगर इन चार महीनों में कोई ब्रज भूमि की यात्रा कर लें तो समझ लें क‍ि आपने सारे तीर्थों के दर्शन कर ल‍िए। शास्‍त्रों के अनुसार देवशयनी से देव प्रबोधिनी एकादशी तक ब्रज की यात्रा करना अन्य सभी दिनों की यात्रा से अधिक पुण्यदायी होता है। इसी दौरान ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। आइए जानते हैं क्‍यों इस धाम को हर तीर्थ का तीर्थ कहा जाता है और क्‍यों इसकी यात्रा है इतनी पुण्‍यफलदायी…

इसलिए कहते हैं तीर्थों का तीर्थ

यह तो हम सभी जानते हैं क‍ि प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है। लेकिन श्रीगर्ग संहिता में एक प्रसंग आता है जहां स्‍वयं तीर्थराज प्रयाग मथुरा मंडल का पूजन करते हैं। साथ ही श्रीहर‍ि की अनुमत‍ि से सभी तीर्थ चतुर्मास में ब्रज भूमि में ही निवास करते हैं। श्रीगर्ग संहिता के अनुसार, शंखासुर नाम का एक दैत्य था। एक बार जब सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी निद्रा में थे। तब इस असुर ने ब्रह्माजी से वेदों को चुरा लिया। इसके बाद वेद चुराकर शंखासुर समुद्र में जा छिपा।

इसलिए भगवान व‍िष्‍णु ने ल‍िया था यह अवतार

तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया और समुद्र में जाकर शंखासुर का वध कर दिया। प्रयाग पहुंचकर ब्रह्माजी को भगवान विष्णु ने सारे वेद सौंप दिए। इसके साथ ही प्रयाग को तीर्थराज की उपाधि भी दे दी। श्रीहरि द्वारा प्रयागराज को तीर्थराज बनाने के बाद सभी तीर्थों ने प्रयागराज का पूजन किया। लेकिन मथुरा और वृंदावन वहां नहीं पहुंचे। एक दिन नारदजी ने आकर प्रयागराज से कहा कि सभी तीर्थों ने तुम्हारा पूजन किया लेकिन मथुरा मंडल ने नहीं अर्थात ब्रज क्षेत्र ने तुम्हारा तिरस्कार किया है।

प्रयागराज की समस्‍या का श्रीहर‍ि ने ऐसे क‍िया न‍िदान

इसके बाद प्रयागराज श्रीहरि के पास पहुंचे और बोले भगवान आपने मुझे तीर्थराज बनाया है। लेकिन ब्रज भूमि ने अंहकार में आकर मेरा तिरस्कार किया है। इस पर श्रीहरि ने कहा क‍ि मैंने तुम्हें पृथ्वी के सब तीर्थों का राजा अवश्य बनाया है। लेकिन अपने घर का राजा नहीं बनाया है। मथुरा मंडल मेरा परम धाम है और उस दिव्य धाम का प्रलय में भी संहार नहीं होता है। भगवान विष्णु के मुख से मथुरा मंडल के विषय में ऐसी बातें सुनकर तीर्थराज प्रयाग ने स्वयं मथुरा मंडल और ब्रज भूमि का पूजन किया। इस कारण मथुरा और ब्रज का महत्व प्रयागराज से भी अधिक है।

इसलिए भी बढ़ जाता है चतुर्मास में ब्रज का महत्‍व

चतुर्मास के दौरान वर्षा ऋतु रहती है। हिंदू धर्म के अधिकांश तीर्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं। बरसात के मौसम में पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं हैं। वहीं मथुरा और ब्रज क्षेत्र समतल भूमि पर स्थित तीर्थ है। इसलिए इस दृष्टि से भी चतुर्मास में मथुरा-वृंदावन की यात्रा को प्रमुखता दी गई है। साथ ही चतुर्मास के दौरान समस्त तीर्थ स्‍वयं ही ब्रज भूमि में वास करते हैं और श्रीकृष्ण लीला का आनंद लेते हैं। यह साक्षात विष्णु भगवान का प्रिय धाम है। इसलिए चतुर्मास के दौरान किसी भी तीर्थ में जाने से कहीं अधिक पुण्य मथुरा-ब्रज धाम तीर्थ की यात्रा से प्राप्त होता है।