कूर्म जयंती / लिंग पुराण के अनुसार पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने लिया था कूर्म अवतार

  • यजुर्वेद के शतपथ ब्राह्मण के अनुसार कछुए से शुरू हुई जीवों की उत्पत्ति

वैशाख महीने की पूर्णिमा को कूर्म जयंती मनाई जाती है। ये पर्व इस बार 7 मई, गुरुवार को है। कूर्म यानी कछुआ ये भगवान विणु का ही एक अवतार है। दस अवतारों में इसका नंबर क्या है, इस बारे में पुराणों में अलग-अलग बातें बताई गई हैं। ज्यादातर ग्रंथों में इस अवतार के बारे में कहा गया है कि जब समुद्र मंथन हो रहा था तब भगवान विष्णु ने कछुए का रूप लेकर अपनी पीठ पर मंदराचल पर्वत को संभाला था। इस अवतार के लिए ज्यादातर ग्रंथों में ये भी माना जाता है कि कछुए से ही मनुष्य जीवन की शुरुआत हुई।

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इसलिए हुआ कूर्म अवतार

  • एक बार महर्षि दुर्वासा ने देवताओं के राजा इंद्र को श्राप देकर श्रीहीन कर दिया। इंद्र जब  भगवान विष्णु के पास गए तो उन्होंने समुद्र मंथन करने के लिए कहा। तब इंद्र भगवान विष्णु के कहे अनुसार दैत्यों व देवताओं के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने के लिए तैयार हो गए। समुद्र मंथन करने के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी एवं नागराज वासुकि को नेती बनाया गया। देवताओं और दैत्यों ने अपना मतभेद भुलाकर मंदराचल को उखाड़ा और उसे समुद्र की ओर ले चले लेकिन वे उसे अधिक दूर तक नहीं ले जा सके।
  • तब भगवान विष्णु ने मंदराचल को समुद्र तट पर रख दिया। देवता और दैत्यों ने मंदराचल को समुद्र में डालकर नागराज वासुकि को नेती बनाया। किंतु मंदराचल के नीचे कोई आधार नहीं होने के कारण वह समुद्र में डुबने लगा। यह देखकर भगवान विष्णु विशाल कूर्म (कछुए) का रूप धारण कर समुद्र में मंदराचल के आधार बन गए। भगवान कूर्म  की विशाल पीठ पर मंदराचल तेजी से घुमने लगा और इस प्रकार समुद्र मंथन का संपन्न हुआ।

वेद और पुराणों में कूर्म अवतार

  1. नृसिंह पुराण और भागवत पुराण के अनुसार भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवता है।
  2. शतपथ ब्राह्मण, महाभारत और पद्मपुराण में कहा गया है कि संतति प्रजनन हेतु प्रजापति, कच्छप का रूप धारण कर पानी में संचरण करता है।
  3. लिंग पुराण के अनुसार पृथ्वी रसातल को जा रही थी, तब विष्णु ने कच्छप रूप में अवतार लिया।
  4. पद्मपुराण में बताया गया है कि समुद्र मंथन के दौरान जब मंदराचल पर्वत रसातल में जाने लगा तो भगवान विष्णु ने कछुए का रूप लिया और उसे अपनी पीठ पर संभाला।
  5. कूर्म पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने अपने कच्छपावतार से ऋषियों को जीवन के चार लक्ष्यों (धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष) का वर्णन किया था।