माता लक्ष्मी के हैं 8 स्वरूप हैं, सबकी अलग है महिमा

सनातन धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित किए गए हैं. माता लक्ष्मी (Goddess Laxmi) को धन की देवी कहा जाता है. शुक्रवार (Friday) का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित किया गया है. आपको बता दें माता लक्ष्मी के 8 स्वरूप हैं. जिसमें हर एक स्वरूप का अपना महत्व है. पौराणिक कथाओं (Mythology) और शास्त्रों में हर देवी देवता के कई अवतार और स्वरूप का उल्लेख मिलता है. जिसके बारे में कई सारी रोचक कहानियां और उनकी महिमा के बारे में पढ़ने और सुनने को मिलता रहता है. आज की इस कड़ी में हम जानेंगे माता लक्ष्मी के 8 स्वरूप कौन से हैं और उन सभी की क्या महीमा है.

Laxmi Maa Ke Swaroop- आदी लक्ष्मी (महालक्ष्मी)

आदी लक्ष्मी ही भगवान श्री हरि विष्णु (Vishnu) की पत्नी हैं और यहीं लक्ष्मी का मूल रूप भी मानी जाती हैं. भागवत पुराण के अनुसार ही महालक्ष्मी ने ही तीनों देवता ब्रम्हा, विष्णु और महेश को प्रकट किया है. साथ ही महाकाली और माता सरस्वती की उत्पत्ति भी इन्हीं से हुई है. आदी लक्ष्मी ही जीव जंतुओं को जीवन प्रदान करती हैं और अपने उपासकों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती हैं. महालक्ष्मी ने ही भगवान विष्णु के साथ रहने का निष्चय किया था.

धन लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का दूसरा स्वरूप धन लक्ष्मी (Dhan Lakshami) है. इन्हीं को धन की देवी कहा जाता है. धन लक्ष्मी के एक हाथ में कमल का फूल होता है और दूसरे हाथ में धन से भरा कलश. कहा जाता है कि धन लक्ष्मी की पूजा करने से धन की समस्या नहीं होती. मान्यता है कि देवी पद्मावती से विवाह के लिए भगवान श्री हरि विष्णु के एक अवतार वेंकटेश ने कुबेर से कर्ज लिया था. जिसे वे चुका नहीं पाए थे. तब माता लक्ष्मी धन की देवी के रूप में प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान वेंकटेश की मदद कर उन्हें कर्ज से मुक्त कराया.

धान्य लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का तीसरा स्वरूप धान्य लक्ष्मी को अन्नपूर्णा का अवतार माना जाता है. जिस घर में धान्य लक्ष्मी की पूजा होती है वहां अन्न का भंडार भरा रहता है. इनकी पूजा के अनुसार कभी भी अन्न का अनादर नहीं करना चाहिए.

गज लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का चौथा स्वरूप कमल पुष्प के ऊपर हाथी पर विराजमान मां लक्ष्मी का गज लक्ष्मी स्वरूप है. इनके दोनों तरफ हाथी सूंड में जल भरकर माता गज लक्ष्मी का जलाभिषेक कर रहे होते हैं. जग लक्ष्मी को कृषि की देवी भी माना जाता है. जो लोग कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें माता के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए.

संतान लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का पांचवा स्वरूप संतान लक्ष्मी है. जो स्कंदमाता से मिलता है, इसलिए इन्हें समान ही माना जाता है. संतान लक्ष्मी की चार भुजाएं हैं, इनमें से दो भुजाओं में कलश और दो भुजाओं में तलवार और ढाल लिए हुए हैं. इनकी गोद में बालक स्कंद बैठा है. कहा जाता है कि जिस घर में संतान लक्ष्मी पूजी जाती हैं वहां के लोगों की माता संतान की तरह रक्षा करती हैं. जिन लोगों को संतान चाहिए होती है उन्हें संतान लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करना चाहिए.

वीरा लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का वीरा लक्ष्मी स्वरूप वीरता का प्रतीक है. वीरा लक्ष्मी की आठों भुजाओं में तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र हैं. ये वीरों और साहसी लोगों की आराध्य हैं. इनकी पूजा करने से भक्तों की अकाल मृत्यु नहीं होती. इन्हें कात्यायनी माता का रूवरूप भी माना जाता है.

विजया लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का सातवां स्वरूप विजया या जया लक्ष्मी है. विजया लक्ष्मी लाल साड़ी पहनकर कमल पर विराजमान हैं. इनकी पूजा करने से भक्त हर क्षेत्र में विजयी होता है. कोर्ट कचहरी, या धन संपत्ति से जुड़ा मामला हो विजया लक्ष्मी भक्तों को हर संकट से बचाती हैं.

विद्या लक्ष्मी

लक्ष्मी जी का आठवां स्वरूप विद्या लक्ष्मी है. विद्या लक्ष्मी सफेद साड़ी पहनती हैं. इनका स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी से मिलता-जुलता है. इनकी पूजा से ज्ञान की प्राप्ति होती है और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतindia.news18.com
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