सीख: बच्चे वही सीखते हैं, जो वे अपने बड़ों को करते हुए देखते हैं

मृणाल ताई एक समाज सेविका थीं। गरीब और बेसहारा महिलाओं को उनका हक दिलाने में वह मदद करती थीं। उच्च वर्ग के लोग तो उनका आदर करते ही थे, निचले तबके के लोग भी उनका सम्मान करते थे। वह सभी को समान भाव से देखतीं और बड़ी इज्जत से बात करती थीं। उनका परिवार भी उन्हीं की तरह मिलनसार था। उनकी चार साल की एक बेटी थी, जिसका नाम निहारिका था। एक दिन वह निहारिका के साथ पार्क में खेलने के लिए गईं। मृणाल ताई और निहारिका काफी देर तक पार्क में खेलती रहीं। तभी वहां से एक फल वाला गुजरा। उन दोनों को थकान लगने लगी थी। आइए जानिए अंडे खाने के हैं ये 5 बड़े फायदे

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निहारिका ने मृणाल ताई से फल खाने की इच्छा जताई। मृणाल ताई ज्यादा पैसे लेकर नहीं निकली थीं। पर इतने पैसे थे कि वह दो सेब खरीद सकें। मृणाल ताई ने सेब वाले को रोका और निहारिका के लिए दो सेब खरीद लिए। निहारिका दोनों सेब अपने हाथों में लेकर खूब खुश हुई। मृणाल ताई ने निहारिका से मजाक-मजाक में कहा, निहारिका, एक सेब तुम खा लो, और एक मम्मी को दे दो। मम्मी को भी भूख लगी है। यह सुनते ही निहारिका के हाव-भाव बदल गए। उसने बिना क्षण गंवाए एक सेब उठाया और गप्प से काट लिया। फिर उसने दूसरा सेब उठाया और उसे भी दांत से काटा।

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मृणाल ताई उसकी यह हरकत देख कर एकदम हैरान हो गईं। वह सोचने लगीं, मैंने तो हमेशा यह चाहा कि निहारिका हर चीज बांटकर खाए। लेकिन यह ऐसा क्यों कर रही है? तभी उन्होंने देखा कि निहारिका ने दाएं हाथ वाला सेब मृणाल ताई की तरफ बढ़ाते हुए कहा, मम्मी, आप यह सेब खाइए। यह सेब ज्यादा मीठा है। मृणाल ताई स्तब्ध रह गईं। वह मुस्कराते हुए बोलीं, पर तुमने तो दोनों सेब जूठे कर दिए। मैं कैसे खाऊंगी? निहारिका बोली, मैंने जूठे थोड़े न किए। मैं तो सिर्फ यह देख रही थी कि कौन-सा सेब ज्यादा मीठा है। किसी को अच्छी चीजें ही देते हैं न। मृणाल ताई ने गर्व से बेटी को गले लगा लिया। अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

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