3 मई तक के इस लॉक डाउन में कुछ समय के लिए कोई संयोग नहीं…

3 मई तक लॉक डाउन, यह भी गजब संयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 मई तक लॉकडाउन को बढ़ाने का निर्णय सराहनीय माना जा रहा है। लेकिन सवाल उठता है कि 3 तारीख तक ही लॉकडाउन क्यों रखा गया है। क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे विधाता की कोई चाल। क्योंकि कहते हैं कि संसार में जो कुछ भी होता है वह ईश्वर की प्रेरणा से होता है। ईश्वर मनुष्य की बुद्धि में बैठकर उससे निर्णय करवाता है। अगर आप उस दिन के ग्रह स्थितियों को जानेंगे तो इस बात से इंकार नहीं कर पाएंगे।

कोरोना के कहर में तब आएगी कमी

ज्योतिषीय गणना के अनुसार मंगल, जिसे विनाश और संघर्ष का कारक कहा गया है वह 22 मार्च को शनि की राशि मकर में आए। यहां आकर मंगल उच्च के हो गए। इससे मंगल का प्रभाव बढ़ गया। कमाल की बात देखिए इसी दिन जनता कर्फ्यू लगाया गया। इसके बाद 24 मार्च से पूरे देश में लॉक डाउन घोषित कर दिया गया और अब 4 मई से जब लॉक डाउन समाप्त होगा तो मंगल भी मकर से निकलेंगे। यानी इन दिनों जो पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है उसमें मंगल और शनि का बड़ा हाथ है। शनि मंगल के योग के समाप्त होते ही दुनिया भर में फैले कोरोना के कहर में कमी आने लगेगी।

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धर्म कर्म में बाधा, गुरु फंसे पाप ग्रहों के फेर में

भारत में कोरोना पीडि़तों की संख्या 30 मार्च को अचानक से बढ गयी जब तबलिगी जमात का भंडा फोड़ हुआ। यहां भी कमाल की बात यह रही कि इसी दिन गुरु मकर राशि में पहुंचे और शनि मंगल के बीच में फंसकर पीड़ित हो गए। गुरु को धर्म का कारक माना गया है। गुरु के पीड़ित होने से धर्म-कर्म के कार्यों में बाधा आ रही है। मंदिर, गुरुद्वारे, मस्जिद, चर्च सभी सीमित तरीके से अपने दैनिक कार्यों को पूरा कर पा रहे हैं। लेकिन 4 मई को मंगल मकर राशि से निकल कर कुंभ राशि में आ जाएंगे। इससे बृहस्पति को बल मिलेगा। जनता के बीच व्याप्त भय कम होने लगेगा।

विकास का आरंभ मंगल से शुभारंभ सूर्य

13 अप्रैल से अपनी उच्च राशि राशि मेष में विराजमान हैं। 4 मई से मंगल से मुक्त होने पर बृहस्पति अपनी पूर्ण शक्ति से फल देने में सक्षम हो जाएंगे और धीरे-धीरे अपने सुधारात्मक प्रभाव से लोगों के जीवन में उन्नति को सुनिश्चित करेंगे। किन्तु एक चिंता का विषय यह भी है कि बृहस्पति, जो स्थिरता एवं विकास के प्रतीक हैं, इस समय तेज गति में चल रहे हैं जिसे ज्योतिषीय भाषा में अतिचारी कहा गया है। इस स्थिति में विकास दिखेगा लेकिन यह सच से दूर हो सकता है।

सुधार का प्रथम चरण (4 मई से 15 मई): 4 मई को मंगल के मकर राशि से निकलते ही देश के कई हिस्सों में तालाबंदी में ढील होगी। व्यवसायों के लिए कई प्रकार की छूट व आम जीवन में भी सुधार का आरंभ होगा। इस से देश में कोरोना का प्रभाव भी कम होता दिखने लगेगा।

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द्वितीय चरण (15 मई से 30 जून): 11 मई को शनि और 14 मई को बृहस्पति प्रतिगामी (वक्री) हो जाएंगे। फल दीपिका और उत्तर कालामृत के अनुसार जब भी कोई ग्रह अपनी नीच राशि में होकर प्रतिगामी हो जाता है तो वह उच्चतम फल देता है। बृहस्पति का प्रतिगमन निश्चित रूप से मौजूदा स्थिति में तनाव कम करेगा। जहां तक ​​निर्णय लेने का सवाल है, यह सबसे महत्वपूर्ण अवधियों में से एक होगा। विश्व के नेताओं को अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और व्यवसायों को बचाने के लिए कुछ कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। यह मौजूदा नीतियों के आत्मनिरीक्षण और समीक्षा का समय होगा। 30 जून को, प्रतिगामी बृहस्पति अपनी राशि धनु में आ जाएंगे जिससे उन्हें और अधिक बल मिलेगा। इस स्थिति में वह राहु और केतु की नकारात्मक ऊर्जा को कम करेंगे। इस स्थिति के कारण, विश्व अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक सामान्य रोडमैप पर वैश्विक नेताओं के बीच आम सहमति होने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका जांच के दायरे में आएगी और एक नई विश्व स्वास्थ्य एजेंसी के गठन का विचार होगा।

तृतीय चरण (1 जुलाई से 10 सितंबर): यह वह अवधि है जब बृहस्पति और शनि दोनों ही प्रतिगामी गति में यानी वक्री रहेंगे, जो मौजूदा कानूनों और नौकरियों, व्यवसायों और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे से संबंधित नीतियों में निरंतर परिवर्तन को दर्शाता है। हालांकि, 16 अगस्त को मंगल मेष राशि में प्रवेश करेंगे और शनि एवं मंगल दोनों मिलकर कर्क और तुला राशि को दृष्टिगत करेंगे जिससे मौजूदा व्यवसायों व उद्योगों का पुनर्गठन हो सकता है तथा अर्थव्यवस्था में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलेंगे।

चतुर्थ चरण (11 सितंबर से 20 नवंबर): 13 सितंबर को बृहस्पति मार्गी यानी सीधी चाल से चलने लगेंगे। पहले संस्थागत सभी नई नीतियां अब परिणाम दिखाना शुरू कर देंगी। 23 सितंबर को राहु और केतु का राशि परिवर्तन होगा। राहु वृष और केतु वृश्चिक राशि में आएंगे। तभी से हम जीवन के सभी क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण सुधार देखेंगे। वृश्चिक में केतु खतरनाक वायरस से निपटने के लिए दवाओं और टीकों की उपलब्धता को इंगित करते हैं। इस समय विश्व में एक नई राजनीतिक संरचना के स्थापित होने की भी तैयारी हो सकती है।