masik Shivaratri: दिसंबर में इस दिन है मासिक शिवरात्रि जानें महत्व, तिथि और पूजा विधि

साल में एक बार महाशिवरात्रि का त्योहार पड़ता है। जिसे शिव और शक्ति के मिलन के पर्व के रूप में धूमधाम के साथ मनाया जाता है, लेकिन हर माह मासिक शिवरात्रि का व्रत भी किया जाता है। मासिक शिवरात्रि का भी अपना एक अलग महत्व माना गया है। हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार दिसंबर माह की शिवरात्रि 13 तारीख 2020 दिन रविवार को मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से उपासक की इंद्रिया नियंत्रित रहती हैं। यह दिन शिव जी की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। चलिए जानते हैं मासिक शिवरात्रि का महत्व, और पूजा विधि

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मासिक शिवरात्रि का महत्व

हर माह आने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत भी बहुत ही शुभफलदायी माना जाता है। मान्यता है कि हर माह मासिक शिवरात्रि का व्रत करके निष्ठा और सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने पर उनकी विशेष कृपा प्राप्ति होती है और भक्तों की सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत करने से जातक की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

मनोवांछित वर की कामना के लिए भी इस व्रत शुभफलदायी माना गया है। इस व्रत के बारे में कहा गया है कि जो कन्याएं इस व्रत को करती हैं उन्हें मनोंवांछित वर की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भक्त मासिक शिवरात्रि का व्रत सच्चे मन से करता है उसकी सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

मासिक शिवरात्रि व्रत विधि

अगर आप मासिक शिवरात्रि का व्रत करना चाहते हैं तो इसे महाशिवरात्रि के दिन से आरंभ करना शुभ रहता है।
मासिक शिवरात्रि वाले दिन सूर्योदय से पूर्व उठें और स्नानादि करके निवृत्त हो जाएं।
इस दिन पूरे शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए यानि (पार्वती, गणेश, कार्तिक, नंदी)। इसलिए आप किसी मंदिर में जाकर पूजन कर सकते हैं।
सर्वप्रथम भगवान शिव के प्रणाम करें और जल, शुद्ध घी, दूध, शक़्कर, शहद, दही आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। इस तरह से शिवलिंग का अभिषेक करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

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अभिषेक करने के पश्चात शिवलिंग पर धतूरा और बिल्वपत्र चढ़ाएं। बिल्वपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वे कही से भी कटे-फटे न हो।
भगवान शिव को श्रीफल भी अर्पित करें।
इसके बाद भगवान शिव और पूरे शिव परिवार की धुप, दीप, फल और फूल आदि से पूजा करें।
इस दिन शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करना बहुत अच्छा रहता है। आप पूजा के समय पाठ भी कर सकते हैं।
इस दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। संध्या के समय पूजन करने के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं।
अगले दिन प्रातः उठकर स्नानादि करने के पश्चात शिव जी का पूजन करें और अपने व्रत का पारण कर लें।

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स्रोतwww.amarujala.com
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