इस स्‍थान पर भगवान राम ने किया था अहिल्‍या का उद्धार, नवमी पर अजब प्रथा

कैसी है ये परंपरा? भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जहां राम नवमी के दिन अलग-अलग तरह की प्रथाओं का प्रचलन है। इसी कड़ी में से एक है दरभंगा जिले के अहियारी गांव का मंदिर। जहां बेहद अजीबो-गरीब परंपरा का निर्वहन किया जाता है। हालांकि इस बार लॉक डाउन के चलते मंदिर परिसर में इस परंपरा का न‍िर्वहन होना संभव नहीं है। लेकिन आइए जानते हैं कि क्‍या है इस मंद‍िर का इतिहास और कैसी है ये परंपरा?

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माता अहिल्‍या से है संबंध दरभंगा जिले के अहियारी गांव में अहिल्या नामक स्थान है। यह स्‍थान देवी सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कथा मिलती है कि ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा से इसी स्थान पर मर्यादा पुरुषोत्‍तम राम ने अहिल्या का उद्धार किया था। इस मंदिर में अहिल्‍या कुंड भी है। कहा जाता है कि यहां सच्‍चे मन से किया गया स्‍नान व्‍यक्ति के मान-सम्‍मान में वृद्धि कराता है। साथ ही माता अहिल्‍या की कृपा उसपर बनी रहती है।

इसे चढ़ाने की है परंपरा माता अहिल्‍या के इस मंदिर में राम नवमी के द‍िन बैंगन चढ़ाया जाता है। मान्‍यता है कि बैंगन चढ़ाने से श्रद्धालुओं की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। हालांकि इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि अगर किसी के शरीर में अहिला यानी कि मस्‍से जैसी समस्‍या हो जाए। वहीं वह व्‍यक्ति रामनवमी के द‍िन इस मंदिर में बैंगन चढ़ा दे तो उसकी यह समस्‍या दूर हो जाती है। अन्‍य शारीर‍िक व्‍याधियों से भी मुक्ति मिलती है।

मंदिर में हैं महिला पुजारी यूं तो आप हर जगह पुरुष पुजारी देखते होंगे लेकिन माता अहिल्‍या के मंदिर में पुरुष पुजारी नहीं बल्कि महिला पुजारी पूजा-पाठ का कार्य संपन्‍न कराती हैं। बता दें कि इस मंदिर में भारत के कोने-कोने से तो श्रद्धालु आते ही हैं। लेकिन पड़ोसी देशों से भी भक्‍त माता अहिल्‍या और प्रभु श्रीराम के दर्शन करने आते हैं।