नौतपा 2020 : वस्‍तुओं का दान लाभकारी, नौतपा शुरू – अब 9 दिन पड़ेगी प्रचंड गर्मी

नौतपा में धरती के सबसे करीब आ जाते हैं सूर्य

नौतपा यानी वे 9 दिन जब सूर्य धरती के करीब आ जाता है और 9 दिन सबसे अधिक गर्मी पड़ती है। आज से यानी 25 मई से नौतपा आरंभ हो गया है और अब अगले 9 दिन तक झुलसा देने वाली गर्मी पड़ेगी। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 48 डिग्री को भी पार कर सकता है। ज्‍योतिष शास्‍त्र में नौतपा को सूर्य और अन्‍य नक्षत्रों की स्थिति में बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं क्‍या है नौतपा और इन दिनों किन कामों को करने से मिलेगी राहत…

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ज्‍योतिष की नजर में

ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार, सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से नौतपा का आरंभ माना जाता है और इसकी शुरुआत होते ही प्रचंड गर्मी पड़ना शुरू हो जाती है। इस साल 25 मई से सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 8 जून तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस अवधि के शुरुआती 9 दिनों में सर्वाधिक गर्मी पड़ती है और इस कारण इसे नौतपा कहते हैं।

इन चीजों का किया जाता है दान

रोहिणी नक्षत्र को वृषभ राशि का मस्तक कहा गया है। इस नक्षत्र में तारों की संख्या पांच है। साथ ही इस दौरान चार ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन भी होगा। इस दौरान शीतलदायक वस्तुओं का दान कल्याणकारी रहता है। सुबह स्नान-पूजन करने के बाद सत्तू, घड़ा, सुराही, पंखा और छाता आदि का दान करना चाहिए। इसमें आटे से भगवान ब्रह्मा की मूरत बनाकर पूजा की जाती है।

ठंडी चीजों का सेवन करें

नौतपा में तापमान बहुत अधिक बढ़ जाने से शरीर में पानी की मात्रा बहुत कम रह जाती है। इस कारण दही, नारियल पानी, खरबूत और तरबूज जैसी ठंडक देने वाली चीजों का सेवन करना सबसे अधिक लाभदायी माना जाता है। इन्‍हीं वस्‍तुओं का दान भी करना श्रेष्‍ठ माना जाता है। लॉकडाउन के चलते मजदूरों का पलायन हो रहा है और इन्‍हें इस वक्‍त आपकी मदद की बेहद जरूरत है। इसलिए दान के रूप में आपसे जो संभव हो इन लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

यह कहता है ज्‍योतिष

ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार नौतपा में अधिक गर्मी पड़ना अच्छी बारिश होने का संकेत माना जाता है। अगर नौतपा में गर्मी ठीक न पड़े, तो अच्छी बारिश के आसार कम हो जाते हैं। शनि मंगल की स्थिति जल तत्व में होने से कहीं-कहीं बादल फटने के समाचार भी मिलेंगे। कहीं वर्षा से जन-धन की हानि के योग भी बनते हैं। मंगल जल तत्व की राशि वृश्चिक में होने से मंगल का अग्नि तत्व प्रभाव नष्ट होकर सौम्य असर देगा। इसी कारण वर्षा के योग उत्तम हैं।