पांडवों ने वन-वन भटकते हुए स्थापित कर दिए थे ये शिवलिंग, इन शिवलिंग के दर्शन से मिलता है महापुण्य

ममलेश्‍वर महादेव मंदिर, हिमाचल प्रदेश

कई प्राचीन शिवलिंग हैं जिनकी पूजा अर्चना महान पुण्यदायी होती है। इनमें से पांडवों द्वारा स्थापित शिवलिंग का भी खास महत्व है। आइए जानें उन दिव्य शिवलिंगों के बारे में जिनकी स्थापना वन-वन भटकते हुए पांडवों ने की थी। इनकी पूजा का खास है महत्व।

गंगेश्वर महादेव मंदिर, दीव

महादेव शिव को समर्पित गंगेश्वर मंदिर फुडम गांव में है जो दीव से 3 किमी दूर है। गंगेश्‍वर शब्‍द का अर्थ भगवान शिव होता है जो अपनी जटाओं में गंगा समेटे हुए हैं। यह मंदिर अपने आप में अद्भुत मंदिर है। यह मंदिर गुफा में स्थित है, जो समुद्र तट पर है और समुद्र की लहरें शिवलिंग पर आती रहती हैं। यहां पांच शिवलिंग हैं, जिन्हें पांडवों ने अपनी दैनिक पूजा के लिए यहां स्‍थापित किए थे।

भयहरण महादेव मंदिर, उत्तर प्रदेश

भयहरण महादेव मंदिर की स्थापना पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान की थी। यह मंदिर के उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित है। जैसा मंदिर के नाम से पता चलता है कि यहां आने पर भक्‍तों को भय और उलझन से मुक्‍ति मिलती है। इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा हनुमानजी, शिव-पार्वती, संतोषी मां, राधा-कृष्ण, विश्वकर्मा भगवान, बैजूबाबा आदि का मंदिर भी है। यहां महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर जनमानस की अपार भीड़ देखने को मिलती है।

लोधेश्वर महादेव मंदिर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में में रामनगर तहसील में लोघेश्‍वर महादेव का मंदिर स्थित है। बताया जाता है कि लोधेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान की थी। यहां पांडवो ने वेद व्यास मुनि की कहने पर रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया था। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर दूर-दराज से लोग मंदिर के दर्शन करने आते हैं। कहते हैं सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहां पूरी होती है।

पडिला महादेव मंदिर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित इस मंदिर को पांडेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के शिवलिंग के बारे में यहां मान्यता है कि अंग देश और मगध की यात्रा के दौरान पांडवों ने यह शिवलिंग ऋषि भारद्वाज की सलाह पर स्थापित किया था। पांडव एक रात यहां रुके थे। इस मंदिर को कजे नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि यह सिद्धपीठ मंदिर है, यहां आने वालों की झोली खाली नहीं रहती है।

ममलेश्‍वर महादेव मंदिर, हिमाचल प्रदेश पांडवों ने अपने वनवास का कुछ वक्त हिमाचल प्रदेश में भी बिताया था। इस दौरान पांडवों ने ममलेश्‍वर महादेव की स्थापना की। यहीं पर भीम की मुलाकात हिडिंबा से हुई थी, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। यह मंदिर पांच हजार साल से ज्यादा पुराना है। मंदिर में 200 ग्राम गेंहू का दाना और भीम का ढोल मौजूद हैं। मान्यता है कि यह गेंहू का दाना पांडवों ने उगाया था। मंदिर में एक धुना भी है, जो महाभारत काल से निरतंर जल रहा है।

कालीनाथ शिव मंदिर, हिमाचल प्रदेश

कालीनाथ महाकालेश्वर शिव मंदिर हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में स्थित है। कहा जाता है कि पांडवों ने इसकी स्थापना लाक्षागृह से जीवित बचने के बाद की थी। कालेश्वर महादेव मंदिर में ऐसा शिवलिंग है, जो जमीन के अंदर धंसता जा रहा है। उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद कालीनाथ मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर जिसके गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग स्थापित है। यहां महादेव के साथ महाकाली का भी वास है।

लाखामंडल महादेव मंदिर, उत्तराखंड

लाखामंडल मंदिर देहरादून से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमुना नदी की तट पर है। बताया जाता है कि लाक्षागृह से बच निकलने के बाद पांडव बहुत समय तक यहां रुके थे। इस दौरान उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां दो शिवलिंग अलग-अलग रंगों और आकार के साथ स्थित हैं। खुदाई के दौरान कई ऐतिहासिक काल के शिवलिंग मिले थे। मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं। मान्यता है कि यहां पर महाशिवरात्रि को जो भी श्रद्धालु आता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।