Pitrupaksha 2020: कोरोना काल में प्रयागराज के तीर्थ पुरोहित कराएंगे ऑनलाइन पिंडदान, दो सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष

कोरोना काल में दो सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष में ऑनलाइन भी मोक्ष का द्वार खुलेगा। प्रयागराज में पिंडदान का महत्व ज्यादा है। इसलिये देश-विदेश के लोग यहां कर्मकांड के लिए आते हैं। लेकिन कोरोना के कारण इस बार संगम में बाहर से कम संख्या में श्रद्धालु आएंगे। इस असुविधा को देखते हुए तीर्थपुरोहित व्हाट्सअप और फेसबुक के जरिये ऑनलाइन पिंडदान भी कराएंगे।

ऑनलाइन वेबसाइट में कराया पंजीकरण

प्रयागराज मेला प्राधिकरण के तीर्थ पुरोहित आचार्य प्रदीप पांडेय ने बताया कि जो व्यक्ति प्रयाग आने में असमर्थ हैं और अपने पूर्वजों का पिंडदान संगम में कराना चाहते हैं, उनके लिये यह अच्छा विकल्प है। ऑनलाइन कर्मकांड के लिए जस्ट डायल वेबसाइट में पंजीकरण भी कराया गया है। इसके संयोजन में दीपू मिश्र, गोपालजी शर्मा और उत्सव पांडेय शामिल हैं।

ऑनलाइन पिंडदान की प्रक्रिया

पांडेय के अनुसार ऑनलाइन पिंडदान की एक निश्चित प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी संबंधित व्यक्ति का मृतक से संबंध, गोत्र, अवस्था, मृत्यु तिथि, कारण, समय, स्थान और फोटो प्राप्त करके विधिविधान से पिंडदान पूरा किया जाएगा। पिंडदान की वीडियो रिकॉर्डिंग सम्बंधित व्यक्ति को भेज दी जाएगी।

श्राद्ध की तिथियां, पांच को तिथि का क्षय

ज्योतिषाचार्य अवध नारायण द्विवेदी के अनुसार दो सितंबर को पूर्णिमा और प्रतिपदा की श्राद्ध होगी। तीन को द्वितीया और चार को तृतीया की श्राद्ध होगी। लेकिन तृतीया तिथि का मान पांच सितंबर को दोपहर 02:21 तक रहेगा। साथ ही पांच को दोपहर में चतुर्थी का मान न होने से चतुर्थी का श्राद्ध 6 को होगा। पांच को कोई श्राद्ध नहीं है। सात को पंचमी, आठ को षष्ठी, नौ की सप्तमी, 10 को अष्टमी, 11 को नवमी, 12 को दशमी, 13 को एकादशी, 14 को द्वादशी, 15 को त्रयोदशी, 16 को चतुर्दशी और 17 को अमावस्या की श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा।

19 साल बाद मलमास का संयोग

17 को पितृ विर्सजन के बाद 18 सितंबर से मलमास शुरू होगा। इससे पहले पितृपक्ष के बाद मलमास की शुरुआत 2001 में हुई थी। 19 साल बाद यह संयोग इस बार भी बन रहा है।

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