वॉर मेमोरियल में PM मोदी ने 1971 युद्ध के रणबांकुरों को दी श्रद्धांजलि, स्वर्णिम मशाल किया प्रज्जवलित

1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के 50 साल पूरे हो गए हैं. ये वही युद्ध था जिसके नतीजे में दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश नाम के नए राष्ट्र का उदय हुआ. इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को छठी का दूध याद दिला दिया था. आइए जानिए इस बार दिसंबर की ठंड.

इस संघर्ष में करारी हार झेलने के बाद पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को भारत के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था. पाकिस्तान के खिलाफ जंग में जीत और बांग्लादेश की आजादी के बाद से भारत 16 दिसंबर को विजय दिवस के तौर पर मनाता रहा है.

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पीएम ने स्वर्णिम विजय मशाल किया प्रज्जवलित

राष्ट्रीय समर स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के बाद 4 स्वर्णिम विजय मशाल प्रज्जवलित किए. इन मशालों को देश के अलग अलग कोनों में ले जाया जाएगा. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी जब सैनिकों को श्रद्धांजलि दे रहे थे तो उस दौरान राजपथ पर लड़ाकू विमानों ने फ्लाई पास्ट भी किया.

1971 युद्ध के नायकों को देश कर रहा याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक में 1971 युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी यहां कुछ देर पहले पहुंचे. यहां पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें रिसीव किया. इसके बाद पीएम मोदी ने 1971 युद्ध के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर 1971 युद्ध के सैनिक भी यहां मौजूद रहे.

स्वर्णिम विजय वर्ष के Logo का अनावरण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर स्वर्णिम विजय वर्ष के लोगो (Logo) का अनावरण किया. इसी के साथ पूरे साल तक चलने वाले स्वर्णिम विजय वर्ष समारोह की शुरुआत हो गई है.

राजपथ पर राफेल विमानों का फ्लाई पास्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब यहां शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे उस वक्त भारत के सबसे आधुनिक विमान राफेल राजपथ पर फ्लाई पास्ट करेंगे और शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

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वॉर मेमोरियल पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक में सेना के जवानों का कार्यक्रम शुरू हो गया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह यहां पहुंच चुके हैं.

यहां पीएम मोदी ने 4 स्वर्णिम विजय मशाल को भी प्रज्जवलित किया. इन मशालों को देश के अलग अलग कोनों में ले जाया जा रहा है. इनमें 1971 युद्ध के परमवीर चक्र और महावीर चक्र विजेता सैनिकों के गांव भी शामिल हैं.

बता दें कि इस युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद दुनिया के सैन्य इतिहास में कई रिकॉर्ड बने. ये लड़ाई हारने के बाद पाकिस्तान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा सैनिकों के साथ सरेंडर करने वाला देश बन गया. इस युद्ध की शुरुआत 3 दिसंबर 1971 को हुई और ये लड़ाई 16 दिसंबर 1971 तक चली. सैन्य इतिहास में इस युद्ध को फॉल ऑफ ढाका भी कहते हैं. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

स्रोतwww.aajtak.in
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