जिस रविदासिया समुदाय के कारण पंजाब चुनाव की तारीख बदली गई, जानिए उसकी अहमियत, बस 5-प्वाइंट में

आज माघी पूर्णिमा है. आज ही के दिन 15वीं सदी के भक्तिमार्गी संत रविदास (Sant Ravidas) की जयंती भी मनाई जाती है. संत रविदास (Sant Ravidas) ने जो शिक्षाएं दीं, उन्हें मानने वाले और जो रास्ता दिखाया, उस पर चलने वाले आज देश ही नहीं, दुनियाभर में लाखों हैं. इन लोगों को ‘रविदासिया’ कहा जाता है. पंजाब (Punjab) में इस ‘रविदासिया समुदाय’ (Ravidasiya Community) की आबादी सर्वाधिक है. इतनी कि इस समुदाय के लोगों के उपस्थिति, अनुपस्थिति दोनों बहुत मायने रखती है. इसका प्रमाण ये है कि हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को रविदास जयंती के मद्देनजर पंजाब में विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections) की तारीख बदलनी पड़ी थी. पहले वहां 14 फरवरी को वोट डाले जाने थे. लेकिन चूंकि बड़ी संख्या में ‘रविदासिया समुदाय’ (Ravidasiya Community) के लोग संत रविदास जयंती के आयोजन में शामिल होने पंजाब से बाहर वाराणसी जा रहे थे. लिहाजा, ईसीआई (ECI) ने पंजाब में मतदान की तारीख (Punjab voting date) आगे बढ़ाकर 20 फरवरी कर दी. जाहिर है, इस समुदाय के बारे में जिज्ञासा कुछ और जानने की हो सकती है. सो, 5-प्वाइंट में कुछ जानकारियां जुटाते हैं.

अंग्रेजों के समय आकार लेना शुरू किया, अब सिखों से अलग

ऐसा कहा जाता है कि रविदासिया समुदाय (Ravidassia Community) ने 20वीं सदी में तब आकार लेना शुरू किया, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था. फिर आजादी के बाद ये लगातार समृद्ध हुआ. विस्तारित हुआ. इस समुदाय में गुरु रविदास (Guru Ravidas) को ‘सतगुरु’ और मौजूदा डेरा प्रमुखों को ‘गुरु’ और पंथ को मानने वालों को ‘भगत’ कहा जाता है. पहले यह समुदाय सिख धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को ही अपना पवित्र प्रतीक मानता था. लेकिन साल 2009 में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में तत्कालीन रविदासिया गुरु संत निरंजन दास (Guru Niranjan das) और उनके नायब संत रामानंद दास पर जानलेवा हमला हुआ था. कहते हैं कि सिख आतंकियों ने यह हमला किया था, जिसमें संत रामानंद दास का निधन हो गया. इसके बाद यह पंथ सिखों से अलग हो गया.

पंजाब के 39 दलित-उपवर्गों में रविदासिया दूसरे सबसे बड़े

‘द पायनियर’ ने हाल ही केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Central Social Justice and Empowerment Ministry) की रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसमें बताया था कि पंजाब (Punjab) में दलितों (SC) के करीब 39 उपवर्ग हैं. इनमें भी 5 उपवर्ग ऐसे हैं, जिनमें 80% दलित आबादी (SC Population) आ जाती है. इनमें 5 उपवर्गों में भी 30% मजहबी सिखों के बाद दूसरे सबसे बड़े रविदासिया (Ravidassiya) हैं. ये वहां की कुल दलित आबादी के लगभग 24% के करीब होते हैं. अधिकांश रविदासिया (Ravidassiya) पंजाब (Punjab) के दोआबा क्षेत्र में रहते हैं. इस क्षेत्र में जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला जैसे जिले आते हैं.

करीब 50 लाख आबादी, सबसे बड़ा ठिकाना डेरा सचखंड बल्लां

‘रविदासिया समुदाय’ (Ravidassiya Community) की आबादी करीब 20 से 50 लाख के करीब तक बताई जाती है. इस समुदाय का सबसे बड़ा ठिकाना ‘डेरा सचखंड बल्लां’ (Dera Sachkhand Ballan) हैं. इसका मुख्यालय जालंधर, पंजाब (Jalandhar, Punjab) में है. इसके प्रमुख वही गुरु निरंजन दास हैं, जिन्होंने 2009 में विएना में हुए हमले के बाद अपना रास्ता सिखों से अलग कर लिया था. ‘डेरा सचखंड बल्लां’ (Dera Sachkhand Ballan) के समर्थकों की तादाद 15 लाख से कुछ अधिक बताई जाती है.

सबसे बड़ा तीर्थ वाराणसी, जहां 7 दिनों का आयोजन

वाराणसी में एक जगह है सीर गोवर्धन (Seer Govardhan, Varanasi). यह संत रविदास (Sant Ravidas) की जन्मस्थली कही जाती है. इसीलिए यह जगह रविदासिया समुदाय का सबसे बड़ा तीर्थ भी है. यहां हर साल संत रविदास की जयंती पर 7 दिनों का बड़ा आयोजन होता है. ‘डेरा सचखंड बल्लां’ (Dera Sachkhand Ballan) से ही ट्रेन की ट्रेन भरकर बनारस पहुंचती हैं. इस बार भी पहुंचे हैं. सिर्फ पंजाब से ही नहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, कश्मीर, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, जैसे अन्य राज्यों से भी ‘रविदासिया समुदाय’ के लोग वाराणसी में जुटे हैं. साथ ही, विदेश से भी. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ मुताबिक यह आयोजन सिर्फ ‘जयंत-समारोह’ ही नहीं है, बल्कि ‘रविदासिया समुदाय’ के समर्थकों की तादाद बढ़ाने का भी एक बड़ा जरिया बनता है.

इस बार वाराणसी में आस्था के साथ सियासत का संगम

इस बार चूंकि संत रविदास (Sant Ravidas) जयंती पंजाब सहित 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के बीच है. इसलिए यहां 16 फरवरी को आस्था के साथ-साथ सियासत का संगम भी दिखाई पड़ने वाला है. वाराणसी चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र (PM Narendra Modi’s Parliamentary Consttuency, Varanasi) भी है, इसलिए उन्हें रविदास-जयंती समारोह का न्यौता भेजा गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) को भी बुलाया गया है. दलित-नेता और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती (BSP Chief Mayawati), समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव (SP Chief Ahilesh Yadav) तथा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (National Convener of AAP, Aravind Kejriwal) भी बुलाए गए हैं. पंजाब के पहले दलित-सिख मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Punjab CM Charanjit singh Channi) और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा (Priyanka Vadra, Congress General Secretary) को भी आमंत्रित किया गया है. श्री गुरु रविदास जन्मस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य एनडी चीमा इसकी पुष्टि करते हैं.

अब मौका चूंकि चुनाव का है और समुदाय प्रभावशाली, तो निश्चित माना जा सकता है कि हर पार्टी और नेता यहां तक अपनी पहुंच तो दर्ज कराएगा ही. फिर चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष. अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतindia.news18.com
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