Durga Pooja Special: यहां रावण दहन देखने आते हैं लाखों लोग, बंगाली परिवारों ने शुरू की थी दुर्गा पूजा

झारखंड समेत पूरे देश में दुर्गा पूजा की धूम है. ऐसे में आपको झारखंड में दशहरा के मौके पर आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम के बारे में बताते हैं. दरअसल, सीसीएल कॉलोनी सयाल में साल 1960 में कुछ बंगाली परिवारों ने दुर्गा पूजा मनाना शुरू किया था. बीतते वक्‍त के साथ इस मौके पर आयोजित होने वाले मेल में बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं आने लगे. दुर्गा पूजा के मौके पर आयोजित होने वाला रावण दहन आकर्षण का मुख्‍य केंद्र बन गया. इसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से लोग आने लगे. आज के दिन यहां आयोजित होने वाले रावण दहन को देखने के लिए लाखों की संख्‍या में लोग जुटते हैं. हालांकि, कोरोना के कारण पिछले साल से इस विशेष मौके पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम फीका पड़ गया है.

सीसीएल कॉलोनी सयाल में वर्ष 1960 में दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई थी. यहां बसे बंगाली परिवारों ने दुर्गा पूजा प्रारंभ की थी. बाद के वर्षों में धीरे-धीरे लोग इस आयोजन से जुड़ते चले गए. कोविड-19 के कारण बीते 2 वर्षो से दुर्गा पूजा का आयोजन काफी फीका हो गया है. इस बार भी कोविड गाइडलाइन के तहत श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा और दर्शन कर सुख-शांति की कामना कर रहे हैं. सयाल में होने वाला दुर्गा पूजा रामगढ और हज़ारीबाग ज़िले के लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हुआ करता था. मेला, प्रतिमा, पंडाल आदि को देखने के लिए लोग साल भर इंतजार करते थे.

सयाल में दुर्गा पूजा आयोजन का यह 62वां वर्ष है. यहां की भव्यता देखते ही बनती थी. रामगढ़ ही नहीं इससे सटे हज़ारीबाग के लोग भी यहां का मेला और आकर्षक पंडाल देखने ज़रूर पहुंचते थे. पूरे महोत्सव के दौरान लाखों की भीड़ जुटती थी. कोरोना के कारण आयोजन पर व्‍यापक असर पड़ा है. इस बार श्रद्धालुओ और आम लोगों को दुर्गा पूजा के भव्य और मेला के साथ आयोजित होने की उम्मीद थी. सयाल में दुर्गा पूजा और पंडाल पूरे जिले में औऱ कोयलांचल में खास आकर्षण रहता है.अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

स्रोतhindi.news18.com
पिछला लेखAaj Ka Panchang 14 October 2021: जानिए गुरुवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
अगला लेखInfosys Q2 Results: प्रॉफिट 11.9% बढ़कर 5,421 करोड़ रुपये रहा, ₹15 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान