जगन्‍नाथ पुरी रथयात्रा, 284 वर्षों में पहली बार टूट सकती है जगन्‍नाथ पुरी की रथयात्रा परंपरा…?

क्‍या टल जाएगी जगन्‍नाथजी की रथयात्रा

व‍िश्‍व प्रस‍िद्ध भगवान जगन्‍नाथजी की रथयात्रा पर भी कोरोना वायरस का संकट नजर आ रहा है। खबरों के मुताबिक इस बार या तो रथयात्रा की तारीख स्‍थग‍ित की जा सकती है या फिर सीमित संख्‍या को ध्‍यान में रखते हुए यह यात्रा न‍िकाली जा सकती है। बता दें कि इस रथयात्रा में शामिल होने के लिए देश के लगभग हर हिस्‍से से तकरीबन 8 लाख दर्शनार्थी शामिल होते हैं। बहरहाल रथयात्रा को लेकर अंतिम फैसला 03 मई यान‍ि क‍ि लॉकडाउन के दूसरे फेज के खत्‍म होने पर ही आएगा। लेकिन इससे पहले भी रथयात्रा में विघ्‍न पड़ा है। तो आइए जानते हैं क‍ि क्‍या है पूरा सच और क्‍यों निकालते हैं रथ यात्रा?

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तब 144 साल तक नहीं हुई थी पूजा

284 सालों में यह पहली बार होगा कि जगन्‍नाथपुरीजी की रथयात्रा की तिथि आगे बढ़ाई जाए या फिर सीमित लोगों के साथ यह यात्रा निकाली जाए। लेकिन आपको बता दें क‍ि मंदिर के रिकॉर्ड के मुताबिक सर्वप्रथम 2504 में आक्रमणकारियों के चलते मंदिर पर‍िसर 144 सालों तक बंद रहा। साथ ही पूजा- पाठ से जुड़ी परंपराएं भी बंद रहीं। लेकिन आद्य शंकराचार्या जी ने इन परंपराओं को फिर से शुरू क‍िया। हालांकि तब से लेकर अभी तक हर पर‍िस्थिति में मंदिर की सभी परंपराओं का व‍िध‍िवत् पालन किया जा रहा है।

इस तरह शुरू हुई थी रथयात्रा की परंपरा

कहा जाता है क‍ि भगवान श्रीकृष्‍ण के अवतार जगन्‍नाथजी की रथयात्रा का पुण्‍य सौ यज्ञों के समान होता है। इसकी तैयारी अक्षय तृतीया के द‍िन श्रीकृष्‍ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के न‍िर्माण के साथ शुरू हो जाती है। रथयात्रा के प्रारंभ को लेकर कथा मिलती है कि राजा इंद्रद्यूम अपने पूरे पर‍िवार के साथ नीलांचल सागर (उड़ीसा) के पास रहते थे। एक बार उन्‍हें समुद्र में एक विशालकाय काष्ठ दिखा। तब उन्‍होंने उससे विष्णु मूर्ति का निर्माण कराने का निश्चय किया। उसी समय उन्‍हें एक वृद्ध बढ़ई भी दिखाई द‍िया जो कोई और नहीं बल्कि स्‍वयं विश्वकर्मा जी थे।

भगवान व‍िश्‍वकर्मा ने रखी थी तब यह शर्त

बढ़ई बने भगवान व‍िश्‍वकर्मा ने राजा से कहा क‍ि वह मूर्ति तो बना देंगे। लेक‍िन उनकी एक शर्त है। राजा ने पूछा कैसी शर्त? तब उन्‍होंने कहा कि मैं जिस घर में मूर्ति बनाऊंगा उसमें मूर्ति के पूर्ण रूप से बन जाने तक कोई भी नहीं आएगा। राजा ने इस सहर्ष स्‍वीकार कर लिया। कहा जाता है कि वर्तमान में जहां श्रीजगन्नाथजी का मंदिर है उसी के पास एक घर के अंदर वे मूर्ति निर्माण में लग गए। राजा के परिवारीजनों को बढ़ई की शर्त के बारे में पता नहीं था।

इसलिए ही अधूरी रह गईं ये प्रतिमाएं

कथा के अनुसार रानी ने सोचा कि कई दिन से द्वार बंद है और बढ़ई भी भूखा-प्‍यासा होगा। कहीं उसे कुछ हो न गया हो। यही सोचकर रानी ने राजा से कहा क‍ि कृपा करके द्वार खुलवाएं और वृद्ध बढ़ई को जलपान कराएं। रानी के यह बात सुनकर राजा भी अपनी शर्त भूल गए और उन्‍होंने द्वार खोलने का आदेश द‍िया। कहते हैं कि द्वार खुलने पर वह वृद्ध बढ़ई कहीं नहीं मिला। लेकिन वहां उन्‍हें अर्द्धनिर्मित श्रीजगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलराम की काष्ठ मूर्तियां मिलीं।

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ईश्‍वर ने स्‍वयं द‍िया था यह आदेश

कथा के अनुसार अधूरी पड़ी प्रतिमाओं को देखकर राजा और रानी को अत्‍यंत दु:ख हुआ। लेकिन उसी सयम दोनों ने आकाशवाणी सुनी, ‘व्यर्थ दु:खी मत हो, हम इसी रूप में रहना चाहते हैं इसलिए मूर्तियों को द्रव्य आदि से पवित्र कर स्थापित करवा दो।’ आज भी वे अपूर्ण और अस्पष्ट मूर्तियां पुरुषोत्तम पुरी की रथयात्रा और मंद‍िर में सुशोभित व प्रतिष्ठित हैं। मान्‍यता है कि श्रीकृष्ण व बलराम ने माता सुभद्रा की द्वारिका भ्रमण की इच्छा पूर्ण करने के उद्देश्य से अलग रथों में बैठकर रथयात्रा न‍िकाली थी। तब से ही माता सुभद्रा की नगर भ्रमण की स्मृति में यह रथयात्रा पुरी में हर वर्ष आयोजित की जाती है।

अद्भुद है रथयात्रा में शमिल होने की महिमा 

रथयात्रा एक ऐसा पर्व है जिसमें भगवान जगन्नाथ चलकर अपने भक्‍तों के बीच आते हैं और उनके दु:ख-सु:ख में सहभागी होते हैं। इसका महत्‍व शास्त्रों और पुराणों में भी बताया गया है। स्‍कंद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि जो भी व्‍यक्ति रथयात्रा में शामिल होकर गुंडीचा नगर तक जाता है। वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्‍त हो जाता है। वही जो भक्‍त श्रीजगन्नाथजी का दर्शन करते हुए, प्रणाम करते हुए मार्ग के धूल-कीचड़ से होते हुए जाते हैं वे सीधे भगवान श्रीविष्णु के उत्तम धाम को जाते हैं। इसके अलावा जो गुंडिचा मंडप में रथ पर विराजमान श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा देवी के दक्षिण दिशा को आते हुए दर्शन करते हैं वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं।

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कई राज्‍यों और व‍िदेशों में भी न‍िकलती है रथयात्रा

फिलहाल तो कोरोना वायरस के चलते रथयात्रा के न‍िकाले जाने पर 03 मई को होने वाले फैसले का इंतजार है। लेकिन आपको बता दें क‍ि सामान्‍य स्थितियों में जगन्‍नाथपुरी के अलावा गुजरात, असम, जम्‍मू, द‍िल्‍ली, आंध्र प्रदेश, अमृतसर, भोपाल, बनारस और लखनऊ में भी न‍िकाली जाती है। इसके अलावा बांग्‍लादेश, सैन फ्रांस‍िस्‍को और लंदन में भी रथयात्रा न‍िकाली जाती है।

तिथि आगे बढ़ेगी या दूसरे व‍िकल्‍प ढ़ूढ़ें जाएंगे

जानकारी के अनुसार र‍थयात्रा 23 जून को न‍िकलनी है। इसकी तैयारी धार्मिक न‍ियमों के अनुसार अक्षय तृतीया के द‍िन से शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि मंदिर के अंदर ही रथ निर्माण की तैयारी की जा रही है। हालांकि मंद‍िर पूरी तरह बंद है और पूजा-पाठ संबंधी सभी परंपराओं का न‍िर्वहन मंदिर कमेटी की ओर चयन‍ित पुजारी ही कर रहे हैं। ऐसे में सभी की नजरें 03 मई को खत्‍म होने वाले लॉकडाउन के दूसरे फेज पर है। साथ ही इंतजार है रथयात्रा के निकलने संबंधी घोषणा को लेकर कि तिथ‍ि आगे बढ़ाई जाएगी या फिर सीमित लोगों के साथ यह परंपरा न‍िभाई जाएगी।