RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने छोटे कारोबारियों को दी बड़ी राहत, हेल्थ सेक्टर को 50000 करोड़ का लोन

देश में कोरोना संकट के बीच बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बात की।

देश में कोरोना संकट के बीच बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोना का दूसरी लगह पहले से कहीं ज्यादा घातक है और इसका इकोनॉमी पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद इकोनॉमी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया और अच्छी रिकवरी देखने को मिली। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि COVID-19 महामारी की दूसरी लहर को रोकने के लिए कई राज्यों में लॉकडाउन और अन्य COVID- प्रेरित प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचने की आशंका है। आरबीआई ने बैंकों को प्रायोरिटी सेक्टर के लिए कोविड लोन बुक बनाने के लिए कहा है।

शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते ग्रोथ के अनुमान घट सकते हैं। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर अभी तक ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ऑटो सेक्टर में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। ट्रैक्टर सेगमेंट ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोरोना संकट की जरूरत को देखते हुए इमर्जेंसी हेल्थ सेवाओं को लिए 50000 करोड़ का लोन दिया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा, दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में तेज रिकवरी हुई। मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मॉनसून रहने अनुमान जताया है। अच्छे मॉनसून से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में तेजी रहने की संभावना है।

वीडियो केवाईसी को मंजूरी 

आरबीआई ने कोरोना के बीच केवाईसी नियमों में छूट दी है। आरबीआई गवर्नर ने वीडियो के माध्यम से केवाईसी में तेजी लाने को कहा है। इसके साथ ही डिजीलॉकर और अन्य डिजिटल माध्यम से केवाईसी करवाने को भी मंजूरी दे दी है।

Goldman Sachs ने की भारत के वृद्धि‍ अनुमान में कटौती

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसके चलते कई राज्यों तथा शहरों में लागू लॉकडाउन के मद्देनजर वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के पूर्वानुमान को 11.7 प्रतिशत से घटाकर 11.1 प्रतिशत कर दिया है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर भयानक रूप ले चुकी है और इस बीमारी से अब तक 2.22 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हर दिन संक्रमण के 3.5 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं। इस कारण पूरे देश में सख्त लॉकडाउन की मांग भी जोर पकड़ने लगी है, हालांकि आर्थिक नुकसान को देखते हुए मोदी सरकार ने अभी तक इस कदम से परहेज किया है।

गोल्डमैन सैक्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि लॉकडाउन की तीव्रता पिछले साल के मुकाबले कम है। फिर भी, भारत के प्रमुख शहरों में सख्त प्रतिबंधों का असर साफ दिखाई दे रहा है। शहरों में सख्त लॉकडाउन से सेवाओं पर खासतौर से असर पड़ा है। इसके अलावा बिजली की खपत, और अप्रैल में विनिर्माण पीएमआई के स्थिर रहने से विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं।

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