संकष्टी चतुर्थी: संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त, महत्व और साथ ही जानते हैं पूजा करने विधि

पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को समर्पित गणेश संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 11 अप्रैल दिन शनिवार को है। संकष्टी चतुर्थी का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सारे संकट दूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी की पूजनविधि, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना की जाती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार परेशानियां चल रही हैं तो उसे संकष्टी चतुर्थी के दिन शक्कर मिली दही में छाया देखकर भगवान गणेश को अर्पित करनी चाहिए। इससे सभी रुके हुए काम बन जाते हैं। इस दिन भगवान गणेश को दुर्वा चढ़ाना चाहिए। दुर्वा में अमृत का वास माना जाता है। गणेशजी को दुर्वा अर्पित करने से स्वास्थ का लाभ मिलता है और सभी पापों को अंत भी होता है।

संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

10 अप्रैल को रात 9 बजकर 31 मिनट से चतुर्थी तिथि का आरंभ
11 अप्रैल को चतुर्थी तिथि सायं 07 बजकर 01 मिनट तक।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए ‘मम वर्तमानागामि-सकलानिवारणपूर्वक-सकल-अभीष्टसिद्धये गणेश चतुर्थीव्रतमहं करिष्ये’ इन पंक्तियों के साथ व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पवित्र स्थान पर लाल या पीला कपड़ा चौकी पर बिछाकर उसपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल से छिड़काव करें। फिर भगवान गणेश की प्रतिमा पर गंध, पुष्प, अक्षत, जल, दूर्वा, पान, रोली आदि से विधि विधान के साथ उनका पूजन, अर्चन और स्तवन करना चाहिए। उसके बाद भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग लगाएं और ओम गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करने के बाद भगवान गणपति की आरती कर पूरा दिन उपवास रखें। इस दिन शाम के वक्त भी भगवान गणेश की पूजा-आरती की जाती है और चंद्रमा के दर्शन होने पर शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद सब लोगों में प्रसाद बांटकर स्वयं भी ग्रहण करें और भगवान गणेश के जयकारे लगाएं।