ज्येष्ठ महीने की अमावस्या पर शनि जयंती मनाई जाएगी और इसके बाद आएगी निर्जला एकादशी

  • ज्येष्ठ मास में कब कौन सी खास तिथि आएगी और किस दिन कौन से शुभ काम करना चाहिए

शुक्रवार, 8 मई से शुक्रवार, 5 जून तक हिन्दी पंचांग का तीसरा माह ज्येष्ठ रहेगा। इस माह में सूर्य अपने पूरे प्रभाव में रहता है, गर्मी बढ़ती है। माह के अंत में चंद्र ज्येष्ठा नक्षत्र में रहता है, इसीलिए इसे ज्येष्ठ माह कहते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार ज्येष्ठ मास में जल की बचत करना चाहिए। जल का वाष्पीकरण तेजी से होता है, कई नदियां और तालाब सूख जाएंगे। जमीन का जल स्तर नीचे हो जाएगा, ऐसी स्थिति में जल की बचत करें। जल का दान करें, प्याऊ लगाएं। इस माह में निर्जला एकादशी और शनि जयंती जैसी महत्वपूर्ण तिथियां आएंगी।

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रविवार, 10 मई को गणेश चतुर्थी व्रत है। इस तिथि पर गणेशजी के लिए व्रत करें और विशेष पूजा-पाठ करें।

> गुरुवार, 14 मई को सूर्य वृष राशि में प्रवेश करेगा। इसे वृष संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य को विशेष अर्घ्य अर्पित करें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

> सोमवार, 18 मई को अचला यानी अपरा एकादशी है। इस भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। विष्णुजी के लिए व्रत रखें। महालक्ष्मी की भी पूजा करें।

> शुक्रवार, 22 मई को ज्येष्ठ मास की अमावस्या है। इसी तिथि पर शनिदेव की जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन शनि के लिए तेल का दान करें। ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें।

> मंगलवार, 26 मई को अंगारक चतुर्थी है। इस दिन गणेशजी को दूर्वा चढ़ाएं। पूजा करें और व्रत रखें।

> सोमवार, 1 जून को गंगा दशहरा है। इस दिन घर पर ही गंगा नदी का ध्यान करते हुए स्नान करें। 

> मंगलवार, 2 जून को निर्जला एकादशी है। सालभर की सभी एकादशियों में इसका महत्व काफी अधिक है। इस एकादशी के व्रत से सालभर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल मिलता है।

> शुक्रवार, 5 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है। इस दिन कबीर जयंती भी मनाई जाती है। पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा करें। दान-पुण्य करें।